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यूक्रेन से जंग के बीच पुतिन ने ले ही लिया वो फैसला, जिससे डर रही थी दुनिया

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 25, 2023, 08:57 PM IST

Russia Ukraine War: बेलारूस के साथ समझौते के तहत रूस अब बेलारूसी क्षेत्र में परमाणु हथियारों को तैनात करेगा। हालांकि, हथियारों का नियंत्रण पूरी तरह से मॉस्को के पास ही रहेगा। रूस ने बेलारूस में कम दूरी और कम प्रभाव वाले परमाणु हथियारों को तैनात करने की योजना बनाई है।

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Russia Ukraine War

Russia Ukraine War: यूक्रेन के साथ निर्णायक जंग लड़ रहे रूस ने आखिर वो फैसला ले ही लिया है, जिससे दुनिया डर रही थी। जानकारी के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बेलारूस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत रूस अब बेलारूसी क्षेत्र में परमाणु हथियारों को तैनात करेगा।

हालांकि, हथियारों का नियंत्रण पूरी तरह से मॉस्को के पास ही रहेगा। इस कदम ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको द्वारा पहले की गई सहमति को औपचारिक रूप दिया।

मार्च में पुतिन ने की थी घोषणा

पुतिन ने पहले मार्च में घोषणा की थी कि उनके देश ने बेलारूस में सामरिक, तुलनात्मक रूप से कम दूरी और कम प्रभाव वाले परमाणु हथियारों को तैनात करने की योजना बनाई है। करार पर हस्ताक्षर तब हुआ जब रूस यूक्रेन के बहुप्रतीक्षित जवाबी हमले के लिए तैयार हो गया। रूसी और बेलारूसी दोनों अधिकारियों ने पश्चिम से शत्रुता से प्रेरित यह कदम उठाया। बेलारूस के रक्षा मंत्री विक्टर ख्रेनिन ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु के साथ बैठक के दौरान मिन्स्क में कहा, गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती हमारे लिए अमित्र देशों की आक्रामक नीति का प्रभावी जवाब है।

फिर तेज होती जा रही जंग

रूस-यूक्रेन के बीच को 14 महीने से ज्यादा समय हो गया, लेकिन जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच दोनों देशों की ओर से एक बार फिर से हमले तेज कर दिए हैं। यह कदम तब उठाया गया है, जब रूस की ओर से यूक्रेनी शहर बुखमत में कब्जे का दावा किया जा रहा है। हालांकि, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बार-बार उनके दावे को खारिज कर रहे हैं। बता दें, यूक्रेन-रूस जंग के 14 महीनों के इतिहास में बुखमत की लड़ाई सबसे भयानक और लंबी रही है। दोनों ओर से जमकर नरसंहार हुआ है। इस बीच खबर है कि यूक्रेन की ओर से रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में कई हवाई हमले किए गए हैं। हालांकि, क्रीमिया के गवर्नर ने दावा किया है कि इन हवाई हमलों को नाकाम कर दिया गया। हमलों में 13 लोग घायल हो गए।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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