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होर्मुज खोलने पर बहरीन का प्रस्ताव UNSC में नहीं हो सका पास;चीन-रूस ने किया वीटो

रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी बहरीन के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो कर दिया। जिसके बाद बहरीन समर्थित ईरान विरोधी यह प्रस्ताव को पारित नहीं हो सका।

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होर्मुज स्ट्रेट

Photo : iStock

ईरान से तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का बहरीन का प्रस्ताव यूएनएसी में चीन-रूसे के वीटो के चलते गिर गया है। यह ड्राफ्ट प्रस्ताव ईरान के उन कदमों के खिलाफ लाया गया था जिनके कारण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग होर्मुज में हाल के हफ्तों में लगातार तनाव बढ़ा है। प्रस्ताव में ईरान से कहा गया था कि वह जलडमरूमध्य को तत्काल पुनः खोलकर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करे।

11 वोट मिले,पर वीटो ने रोक दिया प्रस्ताव

यूएनएससी में बहरीन के इस प्रस्ताव को 11 सदस्यों का समर्थन मिला। वहीं, 2 देशों पाकिस्तान और कोलंबिया ने अस्थाई सदस्य के तौर पर मतदान से दूरी बनाई। जबकि रूस और चीन ने वीटो कर दिया। इस तरह बहुमत होने के बावजूद यह पारित नहीं हो सका।

किए गए बदलाव, फिर भी मंजूरी नहीं मिल पाई

इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए इसमें संशोधन भी किया गया था। इसके मूल मसौदे से सैन्य कार्रवाई के स्पष्ट उल्लेख हटा दिए गए थे,लेकिन दो महत्वपूर्ण प्रावधान बरकरार रखे गए थे। जो कि बल प्रयोग की अनुमति और यह निर्धारण कि होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट और आसपास ईरान की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं, थे। इन्हीं बिंदुओं पर रूस और चीन ने गहरी आपत्ति जताई। चीन और रूस ने तर्क दिया कि इससे उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि मसौदा तनाव के मूल कारणों को ध्यान में रखे बिना बल प्रयोग को वैध ठहराता है।

अंतिम मसौदा कैसा था?

जिस प्रस्ताव को मंगलवार को वीटो किया गया, उसमें देशों से यह अपील की गई थी कि वे जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रक्षात्मक समन्वित प्रयास करें। व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा मुहैया कराएं और जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय नौवहन को रोकने या बाधित करने की कोशिशों को रोकें।

साथ ही इसमें ईरान से भी मांग की गई थी कि वहव्यापारिक जहाजों पर हमले बंद करे, नागरिक ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर हमले रोक दे,पारगमन की स्वतंत्रता में बाधा डालना छोड़े।

गौरतलब है कि मतदान ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह या तो जलडमरूमध्य खोल दे या अपने पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमलों के लिए तैयार रहे। दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता है और मौजूदा युद्ध के पांचवें सप्ताह में ईरान की पकड़ के कारण जहाजरानी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्ताव पारित हो भी जाता, तो भी युद्ध पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि इसे रूस-चीन के वीटो से बचाने के लिए पहले ही अत्यधिक कमजोर बना दिया गया था।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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