दुनिया

POK में भारी हिंसा और चुनावी घमासान के बीच बदले शहबाज शरीफ के सुर, प्रदर्शनकारियों से की बातचीत की पेशकश

Shehbaz Sharif POK Offer: पीओके में उग्र प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद बैकफुट पर आई पाक सरकार। पीएम शहबाज शरीफ ने प्रतिबंधित अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से बातचीत की पेशकश की।

Image

POK में भारी हिंसा और चुनावी घमासान के बीच बदले शहबाज शरीफ के सुर, प्रदर्शनकारियों से की बातचीत की पेशकश

POK Protests 2026: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले दो महीनों से अधिक समय से जारी जनआक्रोश, चुनाव में धांधली के आरोपों और सुरक्षा बलों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। भारी विरोध के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि क्षेत्र की शिकायतों और मुद्दों को सैन्य कार्रवाई या टकराव के बजाय मेज पर बैठकर संवाद के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकी पार्टी 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज' (PML-N) पीओके के तीन चरणों वाले विवादित विधानसभा चुनावों में बहुमत की ओर बढ़ रही है।

पीएम शरीफ की दोहरी नीति

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्थिति पर दोतरफा रुख अपनाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों में स्पष्ट अंतर रेखा खींची है।

बातचीत की पेशकश: उन्होंने संकेत दिया कि आगामी नई सरकार प्रतिबंधित 'संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) और प्रदर्शनकारियों से संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

अराजकता पर चेतावनी: शरीफ ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि जो लोग क्षेत्र में अराजकता, हिंसा और अव्यवस्था फैलाने पर तुले हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

राणा सनाउल्लाह का रुख: पीएम के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने हाल ही में प्रदर्शनकारियों को 'देशभक्त' बताते हुए कहा कि 99% जेएएसी (JAAC) सदस्य हमारे अपने भाई हैं और दो-तिहाई बहुमत की सरकार बनते ही पहला काम वार्ता शुरू करना होगा।

क्यों भड़का है पीओके? क्या हैं मुख्य विवाद?

आरक्षित शरणार्थी सीटें (12 Seats)- जेएएसी का आरोप है कि विधानसभा में 12 सीटें जो पाकिस्तान में रह रहे शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, उनका इस्तेमाल पाकिस्तानी प्रतिष्ठान पीओके में कठपुतली सरकार बनाने के लिए करता है।

महंगाई और बिजली दरें- क्षेत्र में गेहूं सब्सिडी खत्म करने, अत्यधिक बिजली बिलों और आर्थिक बदहाली को लेकर जनता सड़कों पर है।

भीषण हिंसा और क्रैकडाउन- नागरिक संगठनों का दावा है कि प्रदर्शनों व चुनावी हिंसा के दौरान दर्जनों नागरिक मारे गए हैं और सैकड़ों गिरफ्तार हुए हैं, जबकि सरकार इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बता रही है।

चुनावों का बहिष्कार- जेएएसी और विपक्षी दलों द्वारा चुनावों में धांधली और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाते हुए चुनाव बहिष्कार का आह्वान किया गया था।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस पूरे चुनावी नाटक और नागरिकों पर हुई बर्बरता पर कड़ा ऐतराज जताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पीओके में कराए जा रहे चुनावों को पूरी तरह से दिखावा करार देते हुए कहा कि ऐसी खोखली कवायदें पाकिस्तानी बलों द्वारा की गई आम नागरिकों की हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपा नहीं सकती हैं।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article