US Army Chief Randy George : अमेरिका के युद्ध मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ वार) पीठ हेगसेथ ने अपने आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को तत्काल सेवा से रिटायर कर दिया है। सीबीएस न्यूज चैनल ने इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है। जनरल रैंडी को सेवा से हटाया जाना ट्रंप प्रशासन का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन को एक ऐसे कमांडर की तलाश है जो सेना पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं हेगसेथ की सोच के अनुसार काम करे।
जनरल रैंडी की सेवा के लिए हम आभारी-प्रवक्ता
इस बारे में हेगसेथ के सलाहकार एवं पेंटागन के प्रवक्ता सीन पैरनेल ने X पर अपने बयान में कहा कि 'सेना के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी ए जॉर्ज तत्काल प्रभाव से रिटायर होंगे। जनरल जॉर्ज ने देश के लिए जो दशकों की सेवा की है, उसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ वार आभारी है। उनके सेवानिवृत्त होने पर हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।'
ट्रंप के एजेंडे को लागू करना चाहते हैं हेगसेथ
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दो अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और मामले से परिचित एक सूत्र ने बताया कि यह पेंटागन के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हालिया बड़े बदलाव का हिस्सा है। फॉक्स न्यूज के पहले होस्ट रह चुके हेगसेथ अपने विभाग को तेजी से नया रूप देने में जुटे हैं। वह जनरलों और एडमिरलों को हटाकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
अभी एक साल से अधिक था रैंडी का कार्यकाल
जॉर्ज का कार्यकाल एक साल से अधिक बाकी था। विभाग ने उनके पद छोड़ने का कोई कारण नहीं बताया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में अपनी ताकत बढ़ा रही है और ईरान के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है। क्षेत्र में हमले मुख्य रूप से नौसेना और वायुसेना द्वारा किए जा रहे हैं, हालांकि अमेरिकी सेना के सैनिकों को एयर डिफेंस सिस्टम के लिए मध्य पूर्व भेजा गया है। अमेरिकी सेना, लगभग 4.5 लाख सक्रिय सैनिकों के साथ, सेना की सबसे बड़ी शाखा है।
हेगसेथ से मतभेद के सार्वजनिक संकेत नहीं थे
अमेरिकी सेना की एलीट 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिक भी मध्य पूर्व पहुंचने लगे हैं, जो संभवतः ईरान में जमीनी अभियानों के लिए तैनात किए जा सकते हैं। हालांकि, हेगसेथ और जॉर्ज के बीच किसी भी तरह के मतभेद के सार्वजनिक संकेत नहीं मिले थे, भले ही हेगसेथ ने विवादित फैसले लिए हों, जैसे सेना के शीर्ष वकील को हटाना और सेना की 250वीं वर्षगांठ (जो ट्रंप के जन्मदिन के साथ पड़ी) पर एक भव्य सैन्य परेड आयोजित करना।
