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भारत-कनाडा विवाद में किसके साथ खड़ा होगा अमेरिका? पेंटागन के अधिकारी ने कर दिया साफ

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 23, 2023, 03:27 PM IST

Canada India Tension: पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि अमेरिका के लिए भारत रणनीतिक रूप से कनाडा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच अगर अमेरिका को किसी एक देश को चुनना होगा तो वह निश्चित तौर पर भारत को चुनेगा।

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भारत-कनाडा विवाद

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Canada India Tension: खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद भारत और कनाडा के बीच रिश्ते बिगड़ गए हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच लोगों की नजरें अमेरिका के स्टैंड पर हैं। दरअसल, इन दिनों भारत से अमेरिका के रिश्ते सबसे मजबूत दौर से गुजर रहे हैं, वहीं कनाडा के साथ अमेरिकी संबंध भी काफी पुराने हैं।

इस बीच पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी ने इसको लेकर रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के बीच अगर अमेरिका को किसी एक देश को चुनना होगा तो वह निश्चित तौर पर भारत को चुनेगा। उन्होंने कहा, दोनों देशों के संबंध काफी महत्वपूर्ण हो चुके हैं।

लंबे समय तक पीएम नहीं रहेंगे ट्रूडो

पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि अमेरिका के लिए भारत रणनीतिक रूप से कनाडा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने जस्टिन ट्रूडो की खराब होती रेटिंग को लेकर कहा कि वह लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर नहीं बने रहेंगे। ऐसे में उनके जाने के बाद अमेरिका फिर से कनाडा से संबंध सुधार सकता है।

ट्रूडो ने कर दी बहुत बड़ी गलती

अमेरिकी अधिकारी ने कहा, मेरे हिसाब से कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने इस तरह आरोप लगाए है कि वह इस का समर्थन नहीं कर सकते, उनके पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए सबूत नहीं हैं। उन्हांने कहा, ट्रूडो को इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि उनकी सरकार एक आतंकवादी को पनाह क्यों दे रही थी। पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कनाडा भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अगर कनाडा इस मुद्दे पर भारत के साथ लड़ाई करना चाहता है तो वह भारत के सामने एक चींटी के समान है। बता दें, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से भारत और कनाडा के रिश्तों में कड़वाहट आ गई है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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