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इमरान खान का क्या होगा? रिहाई के लिए पीटीआई ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; और अधिक प्रदर्शन की तैयारी

Imran Khan News: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल से कब रिहा होंगे? पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने सरकार के खिलाफ विरोध तेज करने की तैयारी कर ली है। पाकिस्तान में सरकार की मुश्किलें बढ़ रही हैं, इमरान की रिहाई के लिए सरकार के खिलाफ पीटीआई और अधिक प्रदर्शन शुरू करेगी।

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इमरान खान, पूर्व प्रधानमंत्री, पाकिस्तान

Pakistan: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के तेजतर्रार नेता अली अमीन गांदापुर ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ और अधिक प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। अली अमीन ने उपमहाद्वीप में एक ऐतिहासिक लड़ाई का जिक्र करते हुए शनिवार को कहा, ‘‘हम पानीपत की लड़ाई की तरह हमले जारी रखेंगे। अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो हम जीतेंगे।’’

क्या इमरान खान जेल से बाहर आएंगे?

अली अमीन ने इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर 24 नवंबर को इस्लामाबाद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी द्वारा किए गए मार्च का जिक्र करते हुए यह बात कही। अली अमीन ने कहा, ‘‘हमने अभी तक सिर्फ पांच हमले किए हैं और बाकी हमले भी जारी रखेंगे।’’

इस्लामाबाद तक मार्च करने की घोषणा

इमरान खान की पार्टी ने अपनी तीन मांगों को लेकर इस्लामाबाद तक मार्च करने की घोषणा की थी। पार्टी जेल में बंद खान और अन्य नेताओं को रिहा करने, आठ फरवरी के चुनाव में पार्टी की जीत को मान्यता देने के अलावा 26वें संविधान संशोधन को निरस्त करने की मांग कर रही है। 26वें संविधान संशोधन ने न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया को बदल दिया था।

इमरान खान, जो पहले क्रिकेट की दुनिया के सितारे थे, राजनीति में कदम रखते ही अपनी नीतियों और विचारों से एक अलग पहचान बनाने में सफल रहे। उन्होंने पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोला, और अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को एक मुख्य राजनीतिक ताकत में बदल दिया। लेकिन जैसे ही उनकी पार्टी ने सत्ता के समीकरणों को चुनौती दी, उनके खिलाफ विभिन्न आरोप और कानूनी मामले सामने आने लगे।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की बहस अब पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। उनका राजनीतिक करियर, जो एक समय पाकिस्तान के सत्ता के केंद्र से जुड़ा था, अब एक ऐसे विवाद में फंसा हुआ है, जो देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के प्रश्नों को उठाता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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