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पाकिस्तान में 6 साल में 2.7 करोड़ गरीब, जिस बलूचिस्तान में भरा है खजाना वहीं है सबसे ज्यादा गरीबी

Pakistan Poverty: पाकिस्तान में गरीबों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। इस समय पाकिस्तान में गरीबों की संख्या 7 करोड़ से ऊपर है।

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पाकिस्तान में लगातार बढ़ रही है गरीबी

Pakistan Poverty: पाकिस्तान पहले ही भूखमरी और गरीबी से जूझ रहा है, अब पाक में गरीबों की संख्या में और इजाफा हुआ है। पिछले 6 साल में पाकिस्तान में 2.7 करोड़ और लोग गरीब हो गए हैं। पाकिस्तान में सबसे ज्यादा गरीबी बलूचिस्तान में है, जो प्राकृतिक रूप से काफी समृद्ध प्रांत है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कई सालों से अच्छी नहीं है, कर्ज के दलदल और आतंकियों को पालने वाला यह देश एक तरह से कंगाल हो चुका है।

छह साल में 7 प्रतिशत की वृद्धि

राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, पाकिस्तान में पिछले छह वर्षों के दौरान गरीबी में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस अवधि में लगभग 2.7 करोड़ (27 मिलियन) नए लोग गरीबी के इस दंश में शामिल हो गए हैं, जिससे देश में गरीबों की कुल संख्या बढ़कर 7 करोड़ (70 मिलियन) तक पहुंच गई है।

'पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (Pakistan Economic Survey 2025-26), जो कि एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दस्तावेज है, उसे संघीय बजट पेश किए जाने से पहले आर्थिक संकेतकों को साझा करने की वार्षिक प्रक्रिया के तहत गुरुवार को जारी किया गया।

  • सर्वेक्षण से पता चलता है कि वर्ष 2018-19 में गरीबी 21.9 प्रतिशत पर थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है।ृ
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गई।
  • शहरी क्षेत्रों में गरीबी 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत पर पहुँच गई है।

प्रांतों की स्थिति

प्रांत-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के सभी क्षेत्रों में गरीबी बढ़ी है:

  • पंजाब प्रांत: गरीबी 16.5% से बढ़कर 23.3% हुई।
  • सिंध प्रांत: 24.5% से बढ़कर 32.6% हुई।
  • खैबर पख्तूनख्वा: 28.7% से बढ़कर 35.3% पर पहुँची।
  • बलूचिस्तान: 41.8% से बढ़कर 47% हो गई।

इन चारों प्रांतों में बलूचिस्तान सबसे अधिक गरीबी दर के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि पंजाब में गरीबी का स्तर सबसे कम दर्ज किया गया।

गरीबी बढ़ने के मुख्य कारण

सर्वेक्षण में नोट किया गया है कि गरीबी में इस भारी बढ़ोतरी के पीछे लगातार लगे आर्थिक झटके हैं। इनमें रिकॉर्ड-तोड़ उच्च मुद्रास्फीति (महंगाई), पाकिस्तानी मुद्रा का अवमूल्यन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तें, बाढ़ जैसी विनाशकारी जलवायु घटनाएं और पश्चिम एशिया का संघर्ष शामिल हैं।

आय की बढ़ती असमानता

आंकड़ों से पाकिस्तान में आय की असमानता बढ़ने का भी पता चलता है। आय की असमानता को मापने वाला राष्ट्रीय 'गिनी गुणांक' 2018-19 के 28.4 से बढ़कर 2024-25 में 32.7 हो गया। इससे साफ है कि गरीबी बढ़ने के साथ-साथ आय के वितरण में भी खाई और चौड़ी हुई है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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