BRICS Summit: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के बाद भाजपा बेहद उत्साहित नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बड़े वैश्विक आयोजन की सफलता से सत्तारूढ़ भाजपा को अपने पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाने का एक बड़ा मौका मिल गया है। अगले साल देश के सात महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस उपलब्धि को विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने के लिए एक मजबूत हथियार माना जा रहा है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, शिखर सम्मेलन के अंत में सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। इस घोषणापत्र पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सभी सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। भाजपा इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह फैसला उन विपक्षी दलों के लिए करारा जवाब है जो लगातार सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रहे थे।
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नीट पेपर लीक और विभिन्न जनमुद्दों को लेकर विपक्षी पार्टियां पिछले कुछ महीनों से सरकार पर आक्रामक थीं, लेकिन ब्रिक्स के सफल समापन ने प्रधानमंत्री मोदी की एक सर्वमान्य और दूरदर्शी वैश्विक नेता की छवि को और निखार दिया है। पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि आगामी 17 सितंबर से शुरू हो रहे एक महीने लंबे 'सेवा संकल्प' अभियान (Seva Sankalp Abhiyan) के दौरान ब्रिक्स की इस अभूतपूर्व सफलता को प्रमुखता से जनता के बीच रखा जाएगा। यह अभियान पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन और सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहा है।
गौरतलब है कि अगले साल उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में भाजपा 'सेवा संकल्प' अभियान के जरिए समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और कूटनीतिक सफलताओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
