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पाकिस्तान में असहमति की कीमत जेल: अदालत का विवादित फैसला, वकील दंपति को सोशल मीडिया पोस्ट पर 17 साल की सजा

पाकिस्तान की एक अदालत ने सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को लेकर मानवाधिकार से जुड़े वकील दंपति को 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद देश में अभिव्यक्ति की आजादी, असहमति के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश बताया है।

Pakistan human rights lawyers jailed

अदालत पर मानवाधिकार की आवाज दबाने का लगा आरोप (सांकेतिक चित्र)

Pakistani Lawyers Sentenced: पाकिस्तान में असहमति की आवाज उठाना एक बार फिर भारी पड़ता नजर आया है। इस्लामाबाद की एक अदालत ने मानवाधिकार के मामलों में सक्रिय वकील जैनब माजरी और उनके पति हादी अली चट्ठा को 17-17 साल की सजा सुना दी। आरोप है कि सोशल मीडिया पर किए गए उनके पोस्ट राज्य और सुरक्षा संस्थानों के खिलाफ थे। इस फैसले उनके परिवार के साथ-साथ मानवाधिकार से जुड़े लोग भी बिफरे नजर आ रहे हैं।

सुनवाई से दूरी, फैसले की जल्दबाजी

शनिवार को जज अफजल मजोका ने यह फैसला सुनाया। दंपति को एक दिन पहले ही इस्लामाबाद में गिरफ्तार किया गया था। वे वीडियो लिंक के जरिए थोड़ी देर के लिए अदालत में पेश हुए, लेकिन उन्होंने सुनवाई का बहिष्कार किया। इसके बाद अदालत ने मुकदमे को समाप्त मानते हुए सीधे फैसला सुना दिया। परिवार और करीबी लोगों का कहना है कि यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं मिला।

‘राज्य विरोधी नैरेटिव’ का आरोप

अदालत के अनुसार, जैनब माजरी के ट्वीट्स में कथित तौर पर ऐसे विचार थे जो प्रतिबंधित संगठनों के एजेंडे से मेल खाते हैं। यह मामला अगस्त 2025 में दर्ज एक शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें कहा गया था कि दंपति सोशल मीडिया के जरिए राज्य और उसकी संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने इसे इलेक्ट्रॉनिक अपराध निवारण कानून (PECA) के तहत गंभीर अपराध बताया। वहीं, दंपति का साफ कहना है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया और उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

फैसले के बाद देश और विदेश के मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे न्यायिक उत्पीड़न और डराने की नीति का हिस्सा बताया। संगठन का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान बल प्रयोग हुआ और बिना स्पष्ट कारण के उन्हें हिरासत में लिया गया, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं। जैनब माजरी, पाकिस्तान की पूर्व मानवाधिकार मंत्री शिरीन माजरी की बेटी हैं। शिरीन माजरी ने इस फैसले को “पूरी तरह गैरकानूनी” बताया। दूसरी ओर, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह साइबर कानूनों के तहत दी गई सजा है।

 Nishant Tiwari
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निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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