Iran US Talk: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के सामने दो टूक कह दिया है कि देश से एक भी ग्राम संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं भेजा जाएगा। इसके साथ ही, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका उसकी सभी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक वॉशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान का सख्त रुख
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता के प्रयासों के तहत तेहरान के दौरे पर हैं। तेहरान में उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ से मुलाकात की।
हालांकि, इस कूटनीतिक कोशिश के बीच ईरान ने अपनी स्थिति बेहद सख्त रखी है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए साफ कहा, "ईरान से एक भी ग्राम संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं निकाला जाएगा। अमेरिका द्वारा विश्वास बहाली के कदम उठाए जाने तक कोई बातचीत नहीं होगी। इस प्रक्रिया की शुरुआत ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह से पूरा करने के साथ होनी चाहिए।"
तेहरान की मुख्य शर्तें
संसद स्पीकर गालिबफ के अनुसार, वॉशिंगटन पर तब तक भरोसा नहीं किया जा सकता जब तक वह ईरान द्वारा पिछले महीने रखी गई शर्तों को पूरा नहीं करता। इन शर्तों में मुख्य रूप से शामिल हैं-
- ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी को खत्म करना।
- ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना।
- क्षेत्रीय मोर्चों पर सभी प्रकार की शत्रुता और सैन्य कार्रवाइयों को रोकना।
इसके अलावा, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के रुख को दोहराते हुए यह भी कहा गया है कि हथियार-ग्रेड के करीब पहुंचने वाले यूरेनियम को देश से बाहर भेजने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
परमाणु संवर्धन बना मुख्य विवाद
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहा विवाद वॉशिंगटन के साथ किसी भी संभावित समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिका, इजराइल और अन्य पश्चिमी देश ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं, क्योंकि ईरान 60% शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है। यह स्तर नागरिक उपयोग की तुलना में काफी अधिक और परमाणु हथियारों के लिए जरूरी लगभग 90% के करीब है। हालांकि, ईरान लगातार परमाणु हथियार विकसित करने की बात से इनकार करता रहा है।
पाकिस्तान पहले भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर चुका है जिसके बाद जून में एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था, लेकिन कुछ हफ्ते बाद ही ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई फिर से शुरू हो गई थी। अब एक बार फिर पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक पहल की जा रही है, लेकिन ईरान की कड़ी शर्तों ने इस राह को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
