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'यहां कोई राजा नहीं'...ट्रंप के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर उतरे, अमेरिका-यूरोप में गलियों में पैर रखने की जगह नहीं, क्या है कारण?

Donald Trump News: ट्रंप का इमिग्रेशन नियमों को सख्ती से लागू करने का अभियान, खास तौर पर मिनेसोटा में, विरोध करने वालों की शिकायतों की लंबी लिस्ट में से सिर्फ एक मुद्दा है। ट्रंप के खिलाफ लोगों का गुस्सा कई कारणों से है।

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'यहां कोई राजा नहीं'...ट्रंप के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर उतरे

Protest Against American President Trump: अमेरिका और यूरोप भर में शनिवार को हुई 'नो किंग्स' रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों ने ईरान में चल रहे युद्ध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मिनेसोटा इस विरोध का मुख्य केंद्र रहा, जहां हजारों लोग ट्रंप के सख्त इमिग्रेशन नियमों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हुए।

सेंट पॉल में कैपिटल लॉन पर आयोजित मिनेसोटा के मुख्य कार्यक्रम में ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने मुख्य कलाकार के तौर पर हिस्सा लिया। उन्होंने और अन्य वक्ताओं ने राज्य के लोगों की इस बात के लिए तारीफ की कि उन्होंने सर्दियों के मौसम में भी सड़कों पर उतरकर, अमेरिकी कस्टम्स और इमिग्रेशन अधिकारियों की बढ़ती मौजूदगी का विरोध किया।

स्प्रिंगस्टीन ने 'स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस' गाना गाया, जिसे उन्होंने फेडरल एजेंट्स द्वारा रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की जानलेवा गोलीबारी के जवाब में लिखा था। स्प्रिंगस्टीन ने गुड और प्रेटी की मौत पर दुख जताया, लेकिन कहा कि ICE के खिलाफ राज्य के विरोध ने देश के बाकी हिस्सों में उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा, 'आपकी ताकत और आपकी प्रतिबद्धता ने हमें बताया कि यह अब भी अमेरिका ही है।' 'और यह प्रतिगामी दुःस्वप्न, और अमेरिकी शहरों पर ये हमले, टिक नहीं पाएंगे।'

लोग न्यूयॉर्क शहर से, जो एक पक्के 'ब्लू स्टेट' में स्थित है और जहां लगभग 85 लाख निवासी हैं, वह ड्रिग्स तक उमड़ पड़े। ड्रिग्स पूर्वी इडाहो का एक छोटा-सा कस्बा है, जिसकी आबादी 2,000 से भी कम है और वो इलाका जहां 2024 में ट्रंप को 66% वोट मिले थे।

अब तक की सबसे बड़ी भीड़ की उम्मीद

US आयोजकों का अनुमान है कि 'नो किंग्स' रैलियों के पहले दो दौर में जून में 50 लाख से ज्यादा और अक्टूबर में 70 लाख लोग शामिल हुए थे। इस हफ्ते उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उन्हें शनिवार को 90 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनकी उम्मीदें पूरी हुईं या नहीं।

आयोजकों ने बताया कि सभी 50 राज्यों में 3,100 से ज्यादा कार्यक्रम, जो अक्टूबर के मुकाबले 500 ज्यादा हैं, वह रजिस्टर किए गए थे।

टोपेका, कंसास में, स्टेटहाउस के बाहर हुई एक रैली में लोगों ने मेंढक राजा और ट्रंप का रूप धर रखा था। वेंडी व्याट 'कैट्स अगेंस्ट ट्रंप' (Cats Against Trump) का बैनर लगाकर लॉरेंस से गाड़ी चलाकर आईं, जो यहां से 20 मील (32 किलोमीटर) पूरब में है और उन्होंने बाद में अपने शहर में होने वाली एक और रैली में शामिल होने के लिए वापस जाने का प्लान बनाया था।

व्याट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन में ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनसे उन्हें तकलीफ होती है, लेकिन यह मेरे लिए बहुत उम्मीद की बात है।

GOP अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शनों को खारिज किया

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन विरोध प्रदर्शनों को 'वामपंथी फंडिंग नेटवर्क' का नतीजा बताया, बताया जिन्हें जनता का बहुत कम असली समर्थन हासिल है।

जैक्सन ने एक बयान में कहा, 'इन 'ट्रंप डिरेजमेंट थेरेपी सेशन' (Trump Derangement Therapy Sessions) की परवाह सिर्फ वही लोग करते हैं, जो इन्हें कवर करने के लिए पैसे लेते हैं, यानी पत्रकार।'

नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी ने भी इन विरोध प्रदर्शनों की कड़ी आलोचना की।

NRCC की प्रवक्ता मौरीन ओ'टूल ने कहा, 'ये 'अमेरिका से नफरत वाली रैलियां' (Hate America Rallies) वामपंथियों की सबसे हिंसक और पागलपन भरी कल्पनाओं को जाहिर करने का एक जरिया बन गई हैं।'

विरोध प्रदर्शन करने वालों के पास मुद्दों की एक लंबी लिस्ट

ट्रंप का इमिग्रेशन नियमों को सख्ती से लागू करने का अभियान, खासकर मिनेसोटा में, प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की लंबी लिस्ट में से सिर्फ एक मुद्दा था। इस लिस्ट में ईरान में युद्ध और ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती भी शामिल थी। मिनेसोटा रैली में बोलने वालों ने अरबपतियों की आर्थिक ताकत की कड़ी आलोचना की।

वॉशिंगटन में, सैकड़ों लोग लिंकन मेमोरियल से होते हुए नेशनल मॉल तक मार्च करते हुए गए। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखा था, 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत घर से होती है।' प्रदर्शनकारियों ने घंटियां बजाईं, ढोल पीटे और 'कोई राजा नहीं' के नारे लगाए।

सिएटल से बिल जार्चो भी वहां मौजूद थे। उनके साथ छह लोग थे जिन्होंने कीड़ों जैसी पोशाक पहनी हुई थी और उनके ऊपर 'LICE' लिखा हुआ था। यह ICE का मजाक उड़ाने का एक तरीका था, जिसे उन्होंने 'मॉक एंड ऑ' (मजाक और खौफ) टूर का हिस्सा बताया।

जार्चो ने कहा, 'हम राजा का मजाक उड़ाते हैं।' 'इसका मकसद तानाशाही का मजाक उड़ाना है, जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है।'

सैन डिएगो में पुलिस के मुताबिक, करीब 40,000 लोगों ने मार्च किया।

न्यूयॉर्क में, न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज यूनियन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डोना लिबरमैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ट्रंप और उनके समर्थक चाहते हैं कि लोग विरोध प्रदर्शन करने से डरें।

उन्होंने कहा, 'वे चाहते हैं कि हम इस बात से डरें कि उन्हें रोकने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते।' 'लेकिन आपको पता है क्या? वे गलत हैं — बिल्कुल गलत।'

आयोजकों ने बताया कि रैलियों के लिए मिले दो-तिहाई जवाब (RSVP) बड़े शहरी केंद्रों के बाहर से आए थे। इनमें इडाहो, व्योमिंग, मोंटाना, यूटा, साउथ डकोटा और लुइसियाना जैसे रूढ़िवादी राज्यों के समुदाय शामिल थे, साथ ही पेंसिल्वेनिया, जॉर्जिया और एरिजोना के चुनावी रूप से प्रतिस्पर्धी उपनगरों के लोग भी शामिल थे।

मिनेसोटा कैपिटल में मुख्य कार्यक्रम

आयोजकों ने वहां हुई रैली को राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम घोषित किया। स्प्रिंगस्टीन के मंच पर आने से पहले, आयोजकों ने एक वीडियो दिखाया जिसमें अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने कहा कि वह ट्रंप की वजह से हर सुबह उदास होकर उठते हैं, लेकिन शनिवार को वह ज्यादा खुश थे क्योंकि लाखों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने मिनेसोटा के लोगों को ICE को शहर से बाहर निकालने के लिए बधाई भी दी।

इस कार्यक्रम में गायिका जोन बेज, अभिनेत्री जेन फोंडा, वर्मोंट के अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स और कार्यकर्ताओं, मज़दूर नेताओं तथा चुने हुए अधिकारियों की एक लंबी सूची भी शामिल थी।

प्रदर्शनकारियों ने कैपिटल की सीढ़ियों पर एक विशाल बैनर लहराया जिस पर लिखा था, 'हमारे पास सीटियां थीं, उनके पास बंदूकें। क्रांति मिनियापोलिस से शुरू होती है।'

अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स की अध्यक्ष रैंडी वेनगार्टन ने कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप भले ही ऐसा दिखावा करें कि वह सुन नहीं रहे हैं, लेकिन वह आज सड़कों पर उतरे लाखों लोगों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।'

अमेरिका के बाहर रैलियां

इन कार्यक्रमों की अगुवाई करने वाले समूह 'इंडिविजिबल' के सह-कार्यकारी निदेशक एजरा लेविन ने एक इंटरव्यू में बताया कि यूरोप से लेकर लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक, एक दर्जन से ज्यादा अन्य देशों में भी प्रदर्शनों की योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि जिन देशों में संवैधानिक राजतंत्र है, वहां लोग इन विरोध प्रदर्शनों को 'कोई तानाशाह नहीं' (No Tyrants) का नाम देते हैं।

रोम में, हजारों लोगों ने प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के खिलाफ नारे लगाते हुए मार्च किया। मेलोनी की रूढ़िवादी सरकार को इस हफ्ते इटली की न्यायपालिका को सुव्यवस्थित करने के लिए लाए गए जनमत संग्रह में बुरी तरह असफलता का सामना करना पड़ा; इस जनमत संग्रह की आलोचना इस आधार पर की जा रही थी कि यह अदालतों की स्वतंत्रता के लिए एक खतरा है। प्रदर्शनकारियों ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों का विरोध करते हुए बैनर भी लहराए, और 'युद्धों से मुक्त दुनिया' की मांग की।

लंदन में, युद्ध का विरोध कर रहे लोगों ने ऐसे बैनर थाम रखे थे जिन पर 'अति-दक्षिणपंथ को रोको' और 'नस्लवाद के खिलाफ खड़े हो' जैसे नारे लिखे थे।

और पेरिस में, सैकड़ों लोग—जिनमें ज्यादातर फ्रांस में रहने वाले अमेरिकी नागरिक थे, वह मजदूर संघों और मानवाधिकार संगठनों के साथ मिलकर बैस्टिल में इकट्ठा हुए। रैली की आयोजक एडा शेन ने कहा, 'मैं ट्रंप के सभी अवैध, अनैतिक, लापरवाह, निकम्मे और कभी न ख़त्म होने वाले युद्धों का विरोध करती हूं।'

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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