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नहीं सुधरा चीन, गलवान झड़प के बाद सैनिकों की तैनाती जस की तस, पेंटागन की रिपोर्ट में खुलासा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 21, 2023, 05:57 PM IST

Pentagon Report on China: रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में चीन ने एलएसी के साथ सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास जारी रखा, इन सुधारों में डोकलाम के पास भूमिगत भंडारण सुविधाएं शामिल हैं।

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Galwan Valley clash

Photo : PTI

Pentagon Report on China: पेंटागन ने एक रिपोर्ट में कहा कि गलवान घाटी में मई 2020 की झड़प के बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निरंतर बल की उपस्थिति बनाए रखी है और बुनियादी ढांचे का निर्माण जारी रखा है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में चीन ने एलएसी के साथ सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास जारी रखा, इन सुधारों में डोकलाम के पास भूमिगत भंडारण सुविधाएं शामिल हैं। इसमें एलएसी के सभी तीन क्षेत्रों में नई सड़कें, पड़ोसी भूटान में विवादित क्षेत्रों में नए गांव, पैंगोंग झील पर दूसरा पुल, केंद्र क्षेत्र के पास एक दोहरे उद्देश्य वाला हवाई अड्डा और कई हेलीपैड शामिल हैं।

2022 में की थी बड़ी तैनाती

चीन ने 2022 में एलएसी के पश्चिमी क्षेत्र में रिजर्व में चार संयुक्त हथियार ब्रिगेड (सीएबी) के साथ झिंजियांग और तिब्बत सैन्य जिलों के दो डिवीजनों द्वारा समर्थित एक सीमा रेजिमेंट तैनात की। चीन ने अन्य थिएटर कमांड से पूर्वी क्षेत्र में तीन हल्के से मध्यम सीएबी और एलएसी के मध्य क्षेत्र में अतिरिक्त तीन सीएबी भी तैनात किए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि हल्के सीएबी का हिस्‍सा अंततः वापस चला गया, तैनात बलों का अधिकांश हिस्सा एलएसी पर बना हुआ है।

मई 2020 में शुरू हुआ था गतिरोध

मई 2020 से अब तक चीनी और भारतीय सेनाओं के बीच एलएसी के पास कई स्थानों पर चट्टानों, डंडों और कंटीले तारों से लिपटे डंडों के साथ झड़पें हुई हैं। परिणामी गतिरोध के कारण विवादित सीमा के दोनों ओर सेनाओं का जमावड़ा शुरू हो गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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