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पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती: मलेशिया ने जब्त किया सरकारी विमान, पैसे न चुकाने पर की कार्रवाई

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 30, 2023, 05:44 PM IST

Malaysia seizes Pakistan Plane: मलेशिया ने पाकिस्तानी की सरकारी एयरलाइन पीआईए के बोइंग 777 प्लेन को जब्त किया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, मलेशिया के क्वालालंपुर एयरपोर्ट पर लीज विवाद में पैसा नहीं चुकाने पर इस तरह की कार्रवाई की गई है।

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मलेशिया ने जब्त किया पाकिस्तान का विमान

Photo : BCCL

Malaysia seizes Pakistan Plane: पाकिस्तान इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ देश में सियासी भूचाल आया हुआ है, दूसरी तरफ यह मुल्क दीवालिया होने की कगार पर खड़ा हुआ है। आलम यह है कि अगर पाकिस्तान ने अपना कर्ज नहीं चुकाया, तो यह देश डिफॉल्टर हो जाएगा। इस बीच पाकिस्तान से जुड़ी एक और खबर सामने आई है। मलेशिया ने पाकिस्तान एक विमान को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा पैसे नहीं चुकाने के बाद की गई है।

जानकारी के मुताबिक,मलेशिया ने पाकिस्तानी की सरकारी एयरलाइन पीआईए के बोइंग 777 प्लेन को जब्त किया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, मलेशिया के क्वालालंपुर एयरपोर्ट पर लीज विवाद में पैसा नहीं चुकाने पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। मलेशिया ने इस विमान को दूसरी बाद जब्त किया है। कहा जा रहा है कि मलेशिया द्वारा कइ्र बार कहे जाने के बाद भी पाकिस्तान ने लीज का पैसा नहीं चुकाया है।

करीब 40 लाख डॉलर देने हैं पाकिस्तान को

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान को बोइंग विमान का करीब 40 लाख डॉलर लीज का पैसा मलेशिया को देना होगा। इसके लिए मलेशिया की ओर से कई बार कहा भी जा चुका है। हालांकि, आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। बता दें, साल 2021 में भी मलेशिया ने एसा ही कदम उठाया था, लेकिन तब दोनों देशों के बीच बातचीत से मसला हल हो गया था।

कर्ज तले दबा हुआ है पाकिस्तान

बता दें, पाकिस्तान इन दिनों कर्ज तले दबा हुआ है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो चुका है, जिस कारण डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका है। उधर, आईएमएफ भी पाकिस्तान को कोई राहत देने को तैयार नहीं है। इसके चलते देश में महंगाई चरम स्तर पर पहुंच चुकी है ओर जनता दाने-दाने को मोहताज है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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