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अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर जो बाइडन कब देंगे अपना आखिरी भाषण? जान लीजिए तारीख और वक्त

World News: अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर जो बाइडन अपना अंतिम भाषण कब देंगे? इस सवाल का जवाब सामने आ चुका है। जानकारी के अनुसार बुधवार को बतौर राष्ट्रपति बाइडन की आखिरी स्पीच होगी। इसी बीच उन्होंने बड़ा दावा कर दिया है कि मैं ट्रंप को हरा देता लेकिन पार्टी की एकजुटता की खातिर पीछे हटा।

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बतौर राष्ट्रपति जो बाइडन की आखिरी स्पीच कब?

Photo : AP

Joe Biden's final speech as US President: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह से पांच दिन पहले 15 जनवरी, बुधवार को ओवल ऑफिस से विदाई भाषण देंगे। बीस जनवरी को पद छोड़ने से पहले यह राष्ट्रपति के तौर पर अमेरिकियों और दुनियाभर के लोगों के लिए बाइडन का अंतिम भाषण होगा, जो रात आठ बजे आरंभ होगा। वह सोमवार को विदेश मंत्रालय में अपने कार्यकाल की विदेश नीति पर केंद्रित एक भाषण देंगे।

15 जनवरी की रात आठ बजे होगा अंतिम भाषण

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव केरिन जीन-पियरे ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि बाइडन सोमवार को अपने भाषण में ‘‘50 से अधिक वर्षों के अपने सार्वजनिक जीवन’’ पर बात करेंगे। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच हुई ‘डिबेट’ में बाइडन (82) का प्रदर्शन कुछ खास नहीं था जिसके बाद से उनकी ही पार्टी के सदस्य बाइडन के इस पद की दौड़ से हटने की बात करने लगे थे और अंतत: बाइडन ने ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने का फैसला किया था।

बाइडन की जगह उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था। हालांकि उन्हें ट्रंप के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

'मैं ट्रंप को हरा देता लेकिन पार्टी की खातिर पीछे हटा'

अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वह नवंबर में हुए आम चुनावों में ट्रंप को हरा देते लेकिन उन्होंने डेमोक्रिटिक पार्टी की एकजुटता की खातिर चुनाव के बीच उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया। बाइडन से शुक्रवार को यहां व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में पूछा गया, “राष्ट्रपति महोदय, क्या आपको चुनाव न लड़ने के अपने फैसले पर खेद है? क्या आपको लगता है कि आपने अपने पूर्ववर्ती (ट्रंप) को अपना उत्तराधिकारी बनने का आसान मौका दिया?” इसपर बाइडन ने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता। मुझे लगता है कि मैं ट्रंप को हरा देता, हरा सकता था। मुझे लगता है कि कमला (हैरिस) ट्रंप को हरा सकती थीं।’’

उन्होंने कहा, "पार्टी को एकजुट करना महत्वपूर्ण है और जब पार्टी इस बात को लेकर चिंतित थी कि मैं आगे बढ़ पाऊंगा या नहीं, तो मैंने सोचा कि पार्टी को एकजुट करना बेहतर होगा। हालांकि मुझे लगा था कि मैं फिर से जीत सकता हूं।”

जून में अटलांटा में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच हुई ‘डिबेट’ में बाइडन (82) का प्रदर्शन कुछ खास नहीं था जिसके बाद से उनकी ही पार्टी के सदस्य बाइडन के इस पद की दौड़ से हटने की बात करने लगे थे और अंतत: बाइडन ने ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने का फैसला किया था। बाइडन की जगह उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था। हालांकि उन्हें ट्रंप के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

'मैं न तो नजरों से ओझल होऊंगा और न ही दिलों से'

मीडिया से बातचीत के दौरान बाइडन ने कहा कि कमला हैरिस फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक ऐसा निर्णय है जिसके बारे में वह सोच सकती हैं। वह चार साल बाद फिर से चुनाव लड़ने के लिए सक्षम है। यह निर्णय उन्हें ही लेना होगा।” इस दौरान बाइडन से पूछा गया, “क्या आप राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी सक्रिय रहने की योजना बना रहे हैं, या आप बुश मॉडल का अनुसरण करने जा रहे हैं, जहां आप लोगों की नजरों से ओझल रहेंगे?"

इसका जवाब देते हुए बाइडन ने कहा, "मैं न तो नजरों से ओझल होऊंगा और न ही दिलों से।” डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता बाइडन 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद छोड़ देंगे। उनकी जगह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे। रिपब्लिकन पार्टी के ट्रंप बाइडन से पहले भी अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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