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इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सीरिया के बफर जोन का किया दौरान, सुरक्षा का लिया जायजा

World News: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीरिया के ‘बफर जोन' का दौरा किया। यूएन के अनुसार सीरिया में 8,80,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए। वहीं फलस्तीन ने बताया है कि गाजा में इजरायली हमले में एक ही परिवार के कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई।

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बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल

Netanyahu Visits Syria's Buffer Zone: सीरिया में हिंसक संघर्ष के बाद इस देश से जुड़े आए दिन बड़े और कई सनसनीखेज मामले सामने आ रहे हैं। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने बड़ा कदम उठाते गपए मंगलवार को सीरिया से लगे ‘बफर जोन’ का दौरा किया है।

नेतन्याहू ने किया सीरिया के बफर जोन का दौरा

इजरायली पीएएम बेंजामिन नेतन्याहू, सीरिया में बशर अल-असद की सरकार के बेदखल होने के बाद पिछले कुछ दिनों में इजरायल द्वारा कब्जा किए गए ‘बफर जोन’ में सुरक्षा संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। इजरायल के किसी नेता ने सीरियाई क्षेत्र में पहली बार प्रवेश किया है।

सीरिया में 8,80,000 से अधिक लोग हुए विस्थापित

सीरिया में हिंसक संघर्ष बढ़ने के बाद 8,80,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायताकर्ताओं ने यह बात कही। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के सहयोगियों ने अनुमान लगाया है कि लगभग 6 प्रतिशत विस्थापित कम से कम एक प्रकार की विकलांगता के साथ जी रहे हैं। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा, "वापसी की गतिविधियां तेज हुई हैं, सहयोगियों ने रविवार को 2,20,000 से अधिक लोगों के लौटने की सूचना दी है। वहीं, इसके अतिरिक्त, 40,000 से अधिक विस्थापित लोग पूर्वोत्तर सीरिया में लगभग 250 सामूहिक केंद्रों में रह रहे हैं।"

कार्यालय ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र और भागीदार भोजन, पानी, नकदी, टेंट और कंबल की सप्लाई कर रहे हैं। वहीं, वैश्विक टीम मेडिकल टीम और आपूर्ति भी तैनात कर रहा है। सीरियाई अरब रेड क्रिसेंट और रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति ने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूएनआईसीईएफ) के सहयोग से शुक्रवार को सीरिया के अलेप्पो प्रांत में तिशरीन बांध की सुविधा की तत्काल और महत्वपूर्ण मरम्मत के लिए एक संयुक्त मिशन चलाया। यूएनआईसीईएफ ने बैकअप जनरेटर को बिजली देने के लिए ईंधन की भी व्यवस्था की, जिससे बांध की सुरक्षित जल निकासी और जल आपूर्ति की सुरक्षा हो सके। पिछले सप्ताह बांध के पास हिंसा के कारण बिजली सप्लाई बाधित हुई, पानी और अन्य प्रमुख सेवाएं बाधित हुईं, जिससे क्षेत्र के लाखों लोग प्रभावित हुए।

सोमवार को, मानवीय मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव और इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने राहत प्रतिक्रिया पर चर्चा करने के लिए दमिश्क में सीरियाई संक्रमणकालीन अधिकारियों से मुलाकात की। ओसीएचए ने अपनी एक सप्ताह की मध्य पूर्व यात्रा के बारे में कहा, "क्षेत्र में इतने तेजी से हो रहे बदलावों और दीर्घकालिक जरूरतों के समय, फ्लेचर की यात्रा में लेबनान, तुर्की और जॉर्डन में भी रुकना शामिल होगा।"

इजरायली हमले में एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत

गाजा में इजरायली हमले में एक ही परिवार के कम से कम आठ लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। फलस्तीनी चिकित्सा कर्मियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्रालय की एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवा के अनुसार, सोमवार देर रात गाजा शहर के मध्य पड़ोसी नगर दाराज में एक घर पर हमला किया गया। बचावकर्मियों ने मलबे के नीचे से दो महिलाओं और चार बच्चों सहित आठ लोगों के शव बरामद किए। एसोसिएटेड प्रेस को मिली हताहतों की सूची के अनुसार, मलबे से बरामद शवों में एक पिता और उसके तीन बच्चे तथा बच्चों की दादी शामिल हैं। इस हमले पर इजरायली सेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है।

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 14 महीनों में गाजा में इजरायली बमबारी और आक्रमण में 45,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं। मंत्रालय के आंकड़ों में लड़ाकों और असैन्य नागरिकों के बीच अंतर नहीं किया गया है, लेकिन उसका कहना है कि मृतकों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे थे। इजरायल ने यह अभियान हमास द्वारा 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इजरायल पर किये गए हमले के प्रतिशोध में शुरू किया था, जिसमें आतंकवादियों ने लगभग 1,200 लोगों की हत्या कर दी थी और 250 अन्य का अपहरण कर लिया था, जिनमें से लगभग 100 लोग अब भी कैद में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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