दुनिया

लेबनान पर इजरायली सेना का कहर, कई समुदायों को दिया इलाका छोड़ने का आदेश

Israel vs Lebanon: इजरायल की सेना ने सीमा के निकट लगभग 24 लेबनानी समुदायों को वहां से चले जाने का आदेश दिया। इजरायली हमलों में हिज्बुल्ला के टॉप मेंमर हसन नसरल्ला और छह शीर्ष कमांडर बीते 10 दिनों में मारे गए हैं। ऐसे में लेबनान के लोग डरे हुए हैं और लगातार पलायन कर रहे हैं।

Image

इजरायल ने लेबनानियों को दिया आदेश।

World News: इजरायल की सेना ने सीमा के निकट लेबनान के लगभग 24 समुदायों को वहां से चले जाने का आदेश दिया है। इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में सेना भेजने के कुछ घंटों बाद मंगलवार को यह आदेश दिया गया। इजरायल की सेना के अरबी प्रवक्ता द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किये गये आदेश में दक्षिणी लेबनान के लगभग 24 समुदायों का जिक्र किया गया है और लोगों को सीमा से लगभग 60 किलोमीटर (36 मील) दूर, अवाली नदी के उत्तर में चले जाने को कहा गया है।

लेबनान की सीमा पर बड़े हमले के प्लान में इजरायल

इजरायल ने एक बड़े अभियान की योजना के तहत लेबनान की सीमा पर छोटे और सटीक हमले किए हैं। पिछले 10 दिन में इजरायली हमलों में हिजबुल्ला के शीर्ष सदस्य हसन नसरल्ला और छह शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। वहीं सेना का कहना है कि लेबनान के बड़े हिस्से में हजारों आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

हिजबुल्ला के खिलाफ सीमित शुरू किया अभियान

इजरायली सेना ने मंगलवार को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों के खिलाफ 'सीमित, स्थानीय' अभियान शुरू कर दिया है जिससे लेबनान के इस आतंकवादी समूह के खिलाफ उसके युद्ध में एक नया मोर्चा खुल गया है। इजरायली सेना ने एक संक्षिप्त घोषणा में कहा कि वह उन इलाकों में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला कर रहा है जो इजरायली सीमा के करीब हैं और हवाई सेना तथा तोपखाना इकाइयां जमीनी बलों के सहयोग के लिए हमले कर रही हैं।

उसने यह नहीं बताया कि यह अभियान कब तक जारी रहेगा लेकिन कहा कि सेना महीनों से इसकी तैयारी कर रही थी। उसने कहा, 'कुछ घंटे पहले ‘इजरायल डिफेंस फोर्सेज’ (आईडीए) ने सीमित, स्थानीय और लक्षित जमीनी हमले शुरू कर दिए। हमलों का लक्ष्य सीमा के करीब स्थित गांव हैं और यह उत्तरी इजरायल में इजरायली समुदायों के लिए खतरा पैदा करते हैं।' इससे पहले, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया था कि इजरायल ने हिजबुल्ला के खिलाफ छोटे जमीनी हमले शुरू किए और सोमवार को अपनी उत्तरी सीमा सील कर दी।

नसरल्ला की मौत के बाद अब क्या करेगा हिजबुल्लाह

विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि इजरायल ने इन हमलों के बारे में अमेरिका को सूचित किया है और उन्होंने इसे 'सीमा के समीप हिजबुल्ला के बुनियादी ढांचे पर केंद्रित सीमित अभियान' बताया। इजरायली सेना और हिजबुल्ला आतंकवादियों के बीच आमने-सामने की लड़ाई की अभी कोई खबर नहीं है। हिजबुल्ला ने सोमवार को अपने नेता हसन नसरल्ला और अन्य शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने के बाद भी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।

आतंकी समूह के कार्यवाहक नेता नईम कासेम ने नसरल्ला की मौत के बाद सोमवार को टेलीविजन पर अपने पहले बयान में कहा कि अगर इजरायल जमीनी हमला करने का फैसला करता है तो हिजबुल्ला के लड़ाके पूरी तरह से तैयार हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article