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इजराइल के साथ कौन-कौन से मुस्लिम देश? हमास को किसका समर्थन; जानिए गाजा वॉर में कैसे बंटी इस्लामिक दुनिया

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 9, 2023, 03:44 PM IST

Israel Palestine war: हमास के हमले के बाद जहां इजराइल को पश्चिमी देशों का साथ मिला है तो ज्यादातर इस्लामिक देशों ने हमास और फिलिस्तीन का समर्थन किया है। संयुक्त अरब अमीरात मध्य-पूर्व का ऐसा पहला बड़ा देश है, जो खुलकर इजराइल के समर्थन में आया है और उसने इस जंग के लिए आतंकवादी संगठन हमास को जिम्मेदार ठहराया है।

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इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष

Israel Palestine war: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया दो धड़ों में बंटी दिखाई दे रही थी। एक तरफ पश्चिमी देश थे, जिन्होंने खुलकर यूक्रेन का समर्थन किया और दूसरी तरफ वे देश, जिन्होंने रूस साथ दिया। इस जंग के बाद इजराइल में छिड़ी जंग दूसरा मौका है, जब दुनिया एक बार फिर दो गुटों में बंट गई है। हमास के हमले के बाद जहां इजराइल को पश्चिमी देशों का साथ मिला है तो ज्यादातर इस्लामिक देशों ने हमास और फिलिस्तीन का समर्थन किया है।

हालांकि, कुछ मुस्लिम देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने इजराइल को लेकर अपना रुख नरम रखा है और उन्होंने शांति की अपील की है। संयुक्त अरब अमीरात मध्य-पूर्व का ऐसा पहला बड़ा देश है, जो खुलकर इजराइल के समर्थन में आया है और उसने इस जंग के लिए आतंकवादी संगठन हमास को जिम्मेदार ठहराया है। यूएई ने अपने बयान में कहा है कि फिलिस्तीनी संगठन हमास के इजरायली शहरों पर हमला बेहद गंभीर और तनाव से भरा हुआ है। मंत्रालय ने कहा, हमास के लोगों ने हजारों रॉकेट बरसाए और भारी गोलीबारी की।

ईरान फिलिस्तीन के साथ

हमास के हमले के बाद इजराइल ने युद्ध का ऐलान कर दिया है। इजराइल के सशस्त्र बल एक के बाद एक हमले कर हमास के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इसके बाद ईरान का बयान आया है। ईरान ने कहा है कि यह हमला फिलिस्तीनियों की तरफ से आत्मरक्षा के लिए उठाया गया कदम है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे इस युद्ध में फिलिस्तीन का समर्थन करें।

सऊदी अरब और कतर भी हमास के साथ

सऊदी अरब ने खुलकर फिलिस्तीन का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सऊदी अरब बार-बार चेतावनी देता रहा कि इजराइल अगर कब्जा जारी रखेगा और फलिस्तीनियों को उनके अधिकारियों से वंचित करेगा तो वे हिंसा करेंगे। वहीं कतर ने इस लड़ाई के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा तनाव के लिए केवल इजराइल जिम्मेदार है, क्योंकि वो फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का दमन करता रहा है। इजरायली सुरक्षा बल लगातार अल-अक्सा मस्जिद पर छापेमारी करते रहे हैं।

मलेशिया और अफगानिस्तान ने भी किया हमास का समर्थन

अफगानिस्तान ने इस युद्ध में फिलिस्तीन का समर्थन किया है। अफगान के विदेश मंत्री ने अपने समकक्ष को फोन कर समर्थन जताया है। वहीं मलेशिया ने भी फिलिस्तीनियों के प्रति समर्थन जताया है । मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा कि इजरायली लगातार फिलिस्तीन के लोगों की जमीन पर संपत्ति पर कब्जा कर रहे हैं। इस अन्याय की वज ह से सैकड़ों निर्दोषों की जान चली गई।

इन इस्लामिक देशों ने बरती नरम

संयुक्त अबर अमीरात के अलावा इंडोनेशिया, बांग्लादेश, तुर्की, बांग्लादेश, पाकिस्तान ने इजराइल को लेकर नरमी बरती है। इंडोनेशिय ने जहां हिंसा को तम्काल खत्म करने का आह्वान किया है तो वहीं बांग्लादेश, पाकिस्तान तुर्की जैसे इस्लामिक देशों ने दोनों पक्षों को मानवीय सुरक्षा के लिए संयम बरतने की वकालत की है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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