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इजरायल का बड़ा दावा, सीरिया में हिजबुल्ला के हथियार तस्करी के ठिकानों पर किये हमले

Israel Hezbollah War: इजरायल ने बड़ा दावा करते हुए ये बताया है कि सीरिया में हिजबुल्ला के हथियार तस्करी के ठिकानों पर हमले किये। इसी बीच हिजबुल्लाह नेता का दावा किया है कि इजरायल के साथ युद्ध में 'बड़ी जीत' हासिल हुई है। आपको बताते हैं इजरायली सेना ने क्या कुछ कहा।

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इजरायल की सेना ने किया बड़ा दावा।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Israel vs Syria: इजरायल की सेना ने शनिवार को कहा कि उसके लड़ाकू विमानों ने लेबनान के साथ सीरिया की सीमा पर हिजबुल्ला के हथियार तस्करी स्थलों पर हमले किये। ये हमले ऐसे समय किये गए हैं जब कई दिनों से इजरायल और हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम लागू है। इसकी वजह से दोनों पक्षों के बीच महीनों से चल रही लड़ाई रुकी थी, लेकिन छिटपुट गोलीबारी जारी है।

हथियार तस्करी के ठिकानों पर इजरायल का हमला

इजरायल की सेना ने बताया कि उसने युद्ध विराम लागू होने के बाद उन स्थलों पर हमला किया, जिनका इस्तेमाल सीरिया से लेबनान तक हथियारों की तस्करी के लिए किया गया था, क्योंकि यह युद्ध विराम की शर्तों का उल्लंघन है। सीरियाई अधिकारियों या उस देश में संघर्ष पर नजर रखने वाले कार्यकर्ताओं की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हिजबुल्ला ने भी तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।

इजरायल के साथ युद्ध में हिजबुल्लाह को 'बड़ी जीत'

हिजबुल्लाह लीडर नईम कासिम ने बुधवार को ऐलान किया कि संगठन ने इजरायल की कोशिशों को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि यहूदी राष्ट्र हिजबुल्लाह को कमजोर करके प्रतिरोध को कमजोर करना चाहता था। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, बुधवार की सुबह इजरायल के साथ युद्ध विराम लागू होने के बाद कासिम ने अपने पहले टेलीविजन भाषण में कहा, "हम जीत गए, क्योंकि हमने दुश्मन को हिजबुल्लाह और प्रतिरोध को खत्म करने से रोक दिया।"

कासिम ने स्वीकार किया कि इजरायल के शुरुआती हमलों ने हिजबुल्लाह के भीतर लगभग दस दिनों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समूह ने जल्द फिर से संगठित होकर अपनी ताकत हासिल कर ली। संगठन ने अपने कमांड और कंट्रोल सिस्टम को दोबारा स्थापित किया। इसके बाद अंततः इजरायल पर हमले शुरू किए।

कासिम ने इस नतीजे को "इजरायली दुश्मन पर एक प्रमुख जीत बताया, जो जुलाई 2006 के युद्ध की जीत से भी बड़ी है।" संघर्ष विराम समझौते पर, कासिम ने स्पष्ट किया, "यह एक संधि या नए समझौता नहीं है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1701 को लागू करने के लिए एक रूपरेखा है।" अपने बयान में कासिम ने फिलिस्तीन के लिए हिजबुल्लाह के अटूट समर्थन की पुष्टि भी की। ज्ञात हो कि इजरायल कैबिनेट ने मंगलवार रात को लेबनान के साथ एक संघर्ष विराम के समझौते को मंजूरी दी थी। इससे गाजा पट्टी में लगभग 14 महीने के संघर्ष के समाप्त होने की भी उम्मीदें जगी हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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