दक्षिणी लेबनान में भीषण संघर्ष के बीच इजरायल और हिजबुल्लाह ने एक बार फिर युद्धविराम (सीजफायर) लागू करने पर सहमति जताई है। क्षेत्रीय और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका, कतर और ईरान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। हालांकि,समझौते को लेकर अभी तक इजरायल और हिजबुल्लाह की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। तीन अधिकारियों ने दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने की जानकारी दी। इन तीन अधिकारियों में दो क्षेत्रीय और एक अमेरिकी अधिकारी हैं।
बीती रात दक्षिणी लेबनान में इजरायल ने मचाई तबाही, कुल 22 मौतें
यह सहमति ऐसे समय में बनी है जब बीते दिन दोनों पक्षों के बीच जंग तेज हो गई थी। इजराइली सेना ने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। इजराइली हवाई हमलों में कम से कम लेबनान में 18 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, इजराइल ने दावा किया कि दक्षिणी लेबनान में लड़ाई के दौरान उसके एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत चार सैनिक मारे गए, जबकि ड्रोन हमले में पांच अन्य सैनिक घायल हुए हैं।
टाल दी गई थी अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता
संघर्ष के कारण शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता भी स्थगित कर दी गई। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की भी संभावना थी। अब मध्यस्थ देश बातचीत के नए कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका ने तरेरी आंखें
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौते को लेकर काफी उत्साहित हैं, वे नहीं चाहते कि किसी वजह से पश्चिम एशिया में तनाव और भड़के। इसी लिए उन्होंने इजरायल को लेबनान को लेकर नई नीति बनाने के लिए कहा था। साथ ही उन्होंने नेतन्याहू से हमले रोकने को भी कहा था। वहीं नेतन्याहू लगातार लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखे हैं। बीते दो दिन पहले इससे नाराज ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर अमेरिका न होता तो इजरायल भी न होता। वहीं, बीते दिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी उनकी तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि नेतन्याहू सरकार को जमीनी हकीकत को समझना होगा। व्हाइट हाउस में आयोजित एक ब्रीफिंग के दौरान वेंस ने कहा था कि अमेरिका इजरायल की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है, लेकिन नेतन्याहू सरकार को जमीनी हकीकत को समझना होगा और शांति प्रक्रिया के महत्व को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि जब तक हिजबुल्लाह से पैदा होने वाला सुरक्षा खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक इजराइली सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। ऐसे में युद्धविराम पर सहमति के बावजूद क्षेत्र में शांति कितनी टिकाऊ होगी, इस पर सवाल बने हुए हैं।
