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गाजा के राहत शिविर पर इजराइल का बड़ा हमला, कम से कम 21 की मौत

Israel Strikes on Gaza: गाजा के जिस क्षेत्र पर हमला हुआ, उसे मानवीय तौर पर सुरक्षित घोषित किया गया था। हालांकि, इजराइल का कहना है कि उसने आतंकी गतिविधियों में शामिल हमास के निशाना बनाकर हमला किया।

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इजराइल का गाजा में बड़ा हमला।

Photo : Twitter

Israel Strikes on Gaza: गाजा में इजरइाल के हवाई हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब इजराइल ने गाजा के राहत शिविरों को निशाना बनाकर हवाई हमला किया है, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत की खबर है। फलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि हमले में कई लोग घायल हुए हैं, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। दक्षिणी शहर खान यूनिस स्थित नासेर अस्पताल के निदेशक आतिफ अल-हौत ने बताया कि इस हवाई हमले में 28 लोग घायल हुए हैं।

इजराइली सेना ने कहा कि वह आंकड़ों की जांच कर रही है, लेकिन उसने इस संबंध में तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। इजराइल की ओर से कहा गया है कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल वरिष्ठ हमास आतंकवादियों पर हमला किया था। बता दें, इस क्षेत्र को इजराइल की ओर से मानवीय तौर पर सुरक्षित घोषित किया गया था, जिसके बावजूद यहां पर हमला हुआ।

मुवासी इलाके को बनाया निशाना

दक्षिणी शहर खान यूनिस के पास मुवासी इलाके में यह हमला किया गया है। इस इलाके में गाजा से विस्थापित हुए हजारों लोग रहते हैं। इजराइल सेना ने फलस्तीन के अन्य क्षेत्रों में किए गए हमले के बाद मुवासी इलाके के राहत शिविर में यह हमला किया है। इससे पहले गाजा के मध्य क्षेत्र पर हुए हमलों में चार बच्चों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी।

14 महीनों से जारी हैं हमले

हमास के अक्टूबर 2023 के हमले के बाद शुरू हुआ गाजा में इजरायल का विनाशकारी युद्ध लगभग 14 महीनों के बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हमास ने अभी भी दर्जनों इजरायली लोगों को बंधक बना रखा है। वहीं, इजराइल लगातार इस क्षेत्र में हमले कर रहा है, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई है और कई विस्थापित हो गए हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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