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इजरायल नहीं मचाएगा तबाही! रमज़ान और पासओवर को लेकर अस्थायी युद्धविराम पर जताई सहमति

World News: इजरायल ने रमज़ान और पासओवर अवधि के लिए अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव पर सहमति जताई है। इसी बीच हजारों इजरायली गाजा में बचे हुए बंदियों की रिहाई और युद्ध विराम समझौते के दूसरे चरण को पूरा करने की मांग करते हुए तेल अवीव में बिगिन स्ट्रीट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आपको इजरायल के इस फैसले से जुड़ी बातें बताते हैं।

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इजरायल ने युद्धविराम पर अस्थायी जताई सहमति।

Israel agrees to Temporary Ceasefire: इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा रमज़ान और पासओवर अवधि के दौरान गाजा में अस्थायी युद्धविराम के प्रस्ताव पर सहमति जताई है, प्रधानमंत्री कार्यालय ने घोषणा की। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पहले से सहमत युद्धविराम का पहला चरण समाप्त होने वाला था।

धार्मिक छुट्टियों के दौरान तनाव को कम करना है युद्धविराम का उद्देश्य

इस अस्थायी युद्धविराम का उद्देश्य धार्मिक छुट्टियों के दौरान तनाव को कम करना है। इसके कार्यान्वयन के बारे में और अधिक जानकारी अभी तक नहीं दी गई है। रमज़ान की शुरुआत होते ही, दुनिया भर में कई लोग प्रार्थना और उपवास के साथ इस महीने का स्वागत करते हैं। लेकिन गाजा में, माहौल गम और अनिश्चितता का है। युद्ध की गूँज अभी भी बनी हुई है, और युद्धविराम के बावजूद, कई लोगों को डर है कि लड़ाई किसी भी समय फिर से शुरू हो सकती है।

यह युद्ध विराम कब तक चलेगा? इस बात की नहीं है कोई निश्चितता

गाजा में रहने वालों के लिए, पिछले संघर्षों की यादें अभी भी ताज़ा हैं। अल जजीरा के अनुसार, एक निवासी 2014 के युद्ध के दौरान रमजान मनाना याद करता है, जब वह एक बच्चे के रूप में आधी रात को हवाई हमलों से भाग रहा था। लेकिन पिछले साल, स्थिति और भी खराब थी। भोजन की कमी थी, और परिवारों ने जो कुछ भी उनके पास था, उसी से अपना उपवास तोड़ा - अक्सर छह लोगों के बीच सिर्फ एक ही कैन हुम्मस या बीन्स साझा किया जाता था। बिजली न होने के कारण, वे अंधेरे में खाना खाते थे, मुश्किल से एक-दूसरे का चेहरा देख पाते थे।

अल जजीरा के अनुसार, युद्ध की गूंज अभी भी ज़ोरदार है। इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि यह युद्ध विराम कब तक चलेगा। लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आगे क्या होगा। उन्हें डर है कि युद्ध फिर से शुरू हो सकता है। अब, जब एक और रमजान शुरू हो रहा है, तो गाजा में कई लोग इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि आगे क्या होगा। इस बीच, हज़ारों इजरायली गाजा में बचे हुए बंदियों की रिहाई और युद्ध विराम समझौते के दूसरे चरण को पूरा करने की मांग करते हुए तेल अवीव में बिगिन स्ट्रीट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

जब इजरायल पर हमास ने कहर बरपाया और अचानक दागे हजारों रॉकेट

7 अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल पर बड़े पैमाने पर हमला किया, जो देश के इतिहास में सबसे घातक हमलों में से एक था। हमला सुबह-सुबह शुरू हुआ, जब गाजा से हजारों रॉकेट दागे गए, जो इजरायल के शहरों और कस्बों को निशाना बना रहे थे। इसके साथ ही, हमास ने वाहनों, पैराग्लाइडरों और पैदल चलकर इजरायल की सीमा का उल्लंघन किया, सैन्य ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों, विशेष रूप से गाजा पट्टी के पास के समुदायों पर धावा बोला।

हमलावरों ने सामूहिक गोलीबारी, अपहरण और अन्य हिंसक कृत्यों को अंजाम दिया, जिसमें नागरिकों और सैनिकों सहित कई लोगों की मौत हो गई। इजरायलियों और विदेशी नागरिकों सहित 200 से अधिक व्यक्तियों को बंधक बनाकर गाजा में लाया गया। इस हमले ने इजरायल को हमास पर युद्ध की घोषणा करने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक हवाई हमले और गाजा पर जमीनी आक्रमण हुआ। 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल में कम से कम 1,139 लोग मारे गए। 7 अक्टूबर का हमला इजरायल के लिए दशकों में सबसे घातक दिन था और तब से इजरायल और हमास के बीच युद्ध जारी है, जिससे दोनों पक्षों के हज़ारों लोग हताहत हुए हैं और गाजा में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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