Donald Trump on France: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की बदहाली के खिलाफ जारी विशाल छात्र प्रदर्शनों को लेकर सख्त बयान दिया है। ट्रंप ने इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह फ्रांस की प्रवासन नीतियों और इस्लाम को ठहराते हुए दावा किया है कि यह स्कूलों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश पर कब्जा करने की कोशिश है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए ये बयान दिया है। उन्होंने लिखा, फ्रांस में जो कुछ भी हो रहा है, वह बेकाबू सामूहिक प्रवासन के अलावा और कुछ नहीं है। यह मुद्दा स्कूलों के बारे में नहीं है, यह एक कभी महान रहे देश पर कब्जा करने की इस्लाम की कोशिश है।
फ्रांस में क्या हो रहा है?
फ्रांस भर में सितंबर के अंत से ही छात्र सैकड़ों हाई स्कूलों के मुख्य द्वारों को बंद कर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र और शिक्षक स्कूलों की खस्ताहाल इमारतों, संसाधनों की कमी, गिरते शैक्षणिक स्तर और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के विरोध में सड़कों पर हैं। मंगलवार को पूरे फ्रांस में लगभग 2.5 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। पेरिस, ल्यों और अन्य शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच छिटपुट हिंसक झड़पें भी हुईं।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव और ट्रंप का राजनीतिक दांव
ट्रंप का यह बयान केवल फ्रांस के हालात पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका की घरेलू राजनीति और आगामी मिडटर्म चुनाव का गहरा गणित है। अमेरिका में अगले महीने (नवंबर 2026) संसद (कांग्रेस) पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव होने जा रहे हैं। अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध, बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों से अमेरिकी जनता में नाराजगी है, जिससे ट्रंप की लोकप्रियता पर असर पड़ा है। रिपब्लिकन पार्टी को डर है कि अगर वे प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रंप के लिए कानून बनाना मुश्किल हो जाएगा।
MAGA आंदोलन और दक्षिणपंथी नैरेटिव
इस राजनीतिक संकट से निपटने के लिए ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी ने अवैध प्रवासन और एंटी-ट्रांसजेंडर जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपना लिया है। ट्रंप समर्थक कमेंटेटर और उनके सहयोगी (जैसे ग्लेन बेक) फ्रांस के प्रदर्शनों के वीडियो शेयर कर अमेरिकी मतदाताओं को यह चेतावनी दे रहे हैं कि पेरिस में हो रहे दंगे पूरे पश्चिमी जगत के लिए एक चेतावनी हैं।
