Iran Nuclear Programme: भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली (Mohammad Fathali) ने कहा है कि ईरान अपने लोगों के कानूनी और वैध अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने साफ कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा और यूरेनियम संवर्धन (Iran Uranium Enrichment) का अधिकार ईरान का हक है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एक इंटरव्यू के दौरान भारत में ईरानी राजदूत ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव (Iran US tensions) पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह दावा करते हैं कि प्रतिबंधों और दबाव की वजह से ईरान कमजोर हो गया है, लेकिन हाल के संघर्षों में ईरान ने अपनी ताकत दुनिया को दिखा दी।
'ईरान के पास अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की पूरी क्षमता'
उनका कहना था कि ईरान के पास आज भी अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की पूरी क्षमता है। मोहम्मद फतहली ने माना कि आर्थिक प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरानी जनता की इच्छाशक्ति, धैर्य और विश्वास ने देश को मुश्किल परिस्थितियों में भी मजबूत बनाए रखा। उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती और लोगों का भरोसा ही ईरान की सबसे बड़ी ताकत है। ईरान के राजदूत ने यह भी कहा कि भविष्य में अगर कोई बातचीत होती है तो वह आपसी सम्मान और बराबरी के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धमकी, दबाव और प्रतिबंधों की नीति से स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का साफ संदेश
यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर उन्होंने दोहराया कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान का अधिकार है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग की बात करता रहा है और इसी दिशा में आगे बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में 60 दिन का एक समझौता भी चर्चा में है। इसमें ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को सीमित करने और परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं। बदले में अमेरिका की ओर से कुछ प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को लेकर बातचीत हो सकती है। हालांकि ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने परमाणु अधिकारों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है और किसी भी समझौते में अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखेगा।
