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ईरान पर फिर होगा अटैक! सेंट्रल कमांड ने ट्रंप को दिखाया हमले का विकल्प, तेहरान भी तैयार

अमेरिकी मीडिया एक्सिओस ने इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से कहा है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करने वाले डील पर ईरान जब तक तैयार नहीं हो जाता तब तक ओमान के पास उसका नेवल ब्लॉकेड जारी रहेगा।

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सैन्य कमांडर के साथ डोनाल्ड ट्रंप। फाइल फोटो

Photo : AP

US Iran War: ईरान पर नए सिरे से हमले की जमीन तैयार हो गई है। दरअसल, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने हमले के विकल्प पेश कर दिए हैं। पहले से लॉक्ड और कॉक्ड सेंट्रल कमांड ईरान पर 'छोटा लेकिन प्रभावी हमला' करने के लिए तैयार है। अब राष्ट्रपति से हमले की मंजूरी मिलते ही ईरान पर दोबारा हमले शुरू हो सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एवं ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ के चेयरमैन ने हमले की योजना पर ट्रंप को करीब 45 मिनट तक जानकारी दी है।

ट्रंप ठुकरा चुके हैं ईरान की शर्तें

दरअसल, युद्ध रोकने के लिए ईरान ने जो तीन शर्तें रखी थीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसे ठुकरा चुके हैं। इसके बाद से चीजें बातचीत की तरफ कम युद्ध की तरफ दोबारा जाने लगी हैं। ईरान पर हमला कब और किस तरीके का होगा, यह ट्रंप तय करेंगे। अमेरिकी मीडिया एक्सिओस ने इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से कहा है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करने वाले डील पर ईरान जब तक तैयार नहीं हो जाता तब तक ओमान के पास उसका नेवल ब्लॉकेड जारी रहेगा। ट्रंप के इस रुख के बाद बातचीत के जरिए होर्मुज खोलने की जो एक उम्मीद थी, वह एक तरह से खत्म हो गई है।

छोटा, तेज और प्रभावी हमला करेगा US

एक्सिओस की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी सेना इस बार ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं पर छोटा, तेज और प्रभावी हमला करने वाली है। बताया जा रहा है कि इस हमले का मकसद ईरान पर दबाव डालकर उसे बाचतीत की टेबल पर लाना है लेकिन ट्रंप के रुख और अमेरिका के हमले की तैयारी के बावजूद ईरान ने झुकने के कोई संकेत नहीं दिए हैं बल्कि उसने अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने यूएस को चेतावनी दी है तो वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई ने अपने संदेश में कहा है कि आक्रमणकारियों की जगह पर्शियन गल्फ यानी फारस की खाड़ी की गहराइयों में है।

ट्रंप की धमकियों पर ईरान चुप नहीं

यहां यह जानना जरूरी है कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान कौन सी तीन शर्तें रखी थीं, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया तो इसमें ईरान की पहली शर्त है कि उसके बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए अमेरिका ने ओमान के पास जो नेवल ब्लॉकेड लगाया है, उसे हटाना होगा। दूसरी शर्त है-अमेरिका को मध्य पूर्व में यानी लेबनान यानी हिज्बुल्ला और उस पर हमले बंद करने होंगे। ये दोनों शर्तें जब पूरी हो जाएंगी तो वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत के लिए आगे आएगा। अमेरिकी धमकियों पर ईरान चुप नहीं है। उसने कहा है कि हमला होने पर वह शांत नहीं बैठेगा। वह अपने नए हथियारों का इस्तेमाल करेगा। ईरान ने कहा है कि इन हथियारों को देखकर अमेरिका को हॉर्ट अटैक आ जाएगा।

चार साल के उच्चतम स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल

वहीं, ट्रंप के ताजा रुख के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत पिछले चार सालों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज बंद होने से सऊदी अरब, इराक, कतर, यूएई का तेल और गैस बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे दुनिया भर में भारी दिक्कत हो रही है और महंगाई बढ़ रही है। होर्मुज में बना गतिरोध कब टूटेगा, इसके आसार अभी नहीं दिख रहे हैं लेकिन एक बात तय है कि ईरान पर अमेरिका का हमला यदि दोबारा होता है तो मध्य पूर्व में युद्ध की आग फिर से भड़क उठेगी। इस युद्ध का दायरा और रूप दोनों बड़ा हो सकता है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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