ईरान-इजराइल,अमेरिका युद्ध आज 21वें दिन में प्रवेश कर गया है। अमेरिका जहां ईरान पर हमला कर रहा है, वहीं इजराइल ईरान और लेबनान दोनों पर बमबारी कर रहा है। पलटवार में ईरान, इजराइल पर तो मिसाइल और ड्रोन से हमले कर ही रहा है, साथ ही वो कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान और इराक के अमेरिकी ठिकानों पर हमला बोल रहा है। कई बार ये हमले एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी किए जा रहे हैं, जिसके कारण पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ रहा है।
शुक्रवार को किन-किन देशों पर हुए हमले
- ईरान की राजधानी तेहरान में सरकारी मीडिया ने बताया कि “दुश्मन के लक्ष्यों” को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं। वहीं इजराइल की सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में कई ठिकानों पर हमलों की एक नई लहर शुरू की है।
- इजराइल ने यह भी कहा कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों की पहचान कर ली गई है और उन्हें रोकने के लिए उसके रक्षा सिस्टम सक्रिय हैं। इस बीच सऊदी अरब ने अपने पूर्वी हिस्सों और अल-जौफ क्षेत्र में कम से कम एक दर्जन ड्रोन मार गिराने की जानकारी दी।
- संयुक्त अरब अमीरात ने भी कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन खतरों का जवाब दे रही है। दुबई में सुनी गई तेज आवाजों को सफल इंटरसेप्शन का परिणाम बताया गया। बहरीन में ईरानी हमले के बाद गिरे मलबे से एक गोदाम में आग लग गई।
- कुवैत में भी सायरन बजाए गए और सेना ने बताया कि वह मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम कर रही है। यहां एक अमेरिकी सैन्य अड्डे के पास विस्फोटों की आवाज भी सुनी गई।
- इस बीच इजराइल ने तेहरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले जारी रखे, जब ईरानी लोग नवरोज मना रहे थे। लगातार बढ़ते हमलों ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
- कुवैत ने शुक्रवार को कहा कि उसकी मीना अल-अहमदी ऑयल रिफाइनरी पर एक बार फिर ईरान के ड्रोन से हमला हुआ, जिससे रिफाइनरी की कई इकाइयों में आग लग गई। इससे पहले गुरुवार को भी इस रिफाइनरी को निशाना बनाया गया था, जिससे वहां आग भड़क उठी थी। कुवैत ने बताया कि शुक्रवार को दमकलकर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं और फिलहाल इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
ईरान के हमले के बाद इजराइल ने बदली रणनीति
इजराइल ने ईरान के प्रमुख प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर और हमले नहीं करने का वादा किया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इस बढ़ते संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अर्थव्यवस्था में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इन हमलों के बाद ईंधन के दामों में तेजी से वृद्धि हुई और ईरान के पड़ोसी अरब देशों के युद्ध में सीधे उतरने का खतरा बढ़ गया है। ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की जिसके बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार देर रात कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर इजराइल अपतटीय गैस क्षेत्र पर फिलहाल कोई हमला नहीं करेगा।
