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ईरान युद्ध पर पाकिस्तान की किरकिरी: तेहरान ने इस्लामाबाद बैठक से किया इनकार; अमेरिकी शर्ते भी ठुकराईं

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्षविराम वार्ताओं को बड़ा झटका लगा है। तेहरान ने इस्लामाबाद बैठक से इनकार कर दिया है। साथ ही अमेरिकी शर्तों को भी ठुकरा दिया है।

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शहबाज शरीफ

Photo : AP

पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा समय से जंग जारी है। हाल-फिलहाल इसके शांत होने के हालात भी नहीं दिख रहे, क्योंकि ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से साफ इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं, ईरान ने वाशिंगटन की शर्तों को 'अस्वीकार्य'करार दिया है। इससे क्षेत्रीय देशों द्वारा चलाए जा रहे मध्यस्थता प्रयास ठप पड़ गए हैं। ये दावा द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में किया गया है।

अमेरिकी मांगे मानने से इनकार

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान,ओमान और अन्य क्षेत्रीय देश अमेरिका-ईरान तनाव कम कराने के लिए बैक-चैनल बातचीत में लगे थे,लेकिन ईरान की ओर से संकेत मिला है कि वह इस्लामाबाद में किसी भी औपचारिक वार्ता के लिए तैयार नहीं है। ईरान ने मध्यस्थों से कहा है कि अमेरिकी मांगें ऐसी हैं जिन्हें वह मान नहीं सकता।

पाकिस्तान की हुई किरकिरी

पाकिस्तान ने पहले खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश किया था। विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण और सार्थक संवाद की मेजबानी करने के लिए तैयार है। हालांकि ताजा घटनाक्रम के बाद इस प्रस्तावित बैठक की संभावना न के बराबर लग रही है।

ट्रंप ने किया था अच्छी बातचीत का दावा

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि वाशिंगटन की ईरान के साथ बातचीत काफी अच्छी चल रही है,लेकिन उन्होंने वार्ता को लेकर कोई विवरण नहीं दिया न ही उन्होंने ये बताया कि उनकी किस ईरानी नेता से वार्ता चल रही है।

इससे पहले, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ़ ने जंग खत्म करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अब दोनों पक्षों की तकलीफों को खत्म करने का समय आ गया है। उन्होंने 'फॉरेन अफेयर्स'पत्रिका में लिखा,'लंबे समय तक चलने वाली शत्रुता से कीमती जानें और अमूल्य संसाधन कहीं ज़्यादा बर्बाद होंगे। ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर बंदिशें लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव देना चाहिए, जिसके बदले उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएं,यह एक ऐसा सौदा है, जिसे वाशिंगटन पहले स्वीकार नहीं करता,लेकिन अब शायद मान ले।'

गौरतलब है कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच इस कूटनीतिक सक्रियता को उम्मीदों से भरा कदम माना जा रहा था,लेकिन ईरान के रुख ने भविष्य की बातचीत पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है। अब यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता होगी भी या नहीं।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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