मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के बाद ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की आशंका तेजी से बढ़ गई है। इस बीच तेहरान में भी जंग की तैयारियों के लिए न सिर्फ सेना बल्कि आम नागरिक भी तैयार हो रहे हैं। सड़कों पर लगातार रैलियां हो रही हैं,आम नागरिकों को हथियार चलाना सिखाया जा रहा है और सरकारी टीवी चैनलों पर एंकर बंदूकें लेकर कार्यक्रम कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ईरान में यह माहौल क्यों बन गया है? क्या वाकई युद्ध का खतरा बढ़ रहा है? और इसका असर पूरी दुनिया पर कितना बड़ा हो सकता है?
ट्रंप के बयान से क्यों बढ़ा तनाव?
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने समझौते के लिए तेजी से कदम नहीं उठाए,तो उसके पास कुछ नहीं बचेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत पहले से ही कमजोर स्थिति में है। युद्धविराम की स्थिति भी बेहद नाजुक मानी जा रही है।
तेहरान में लग रहे डेथ टू अमेरिका के नारे
कई मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि तेहरान की सड़कों पर हर रात सरकार समर्थित रैलियां हो रही हैं। राजधानी के पॉश इलाके तजरीश स्क्वायर में हजारों लोग ईरानी झंडे लेकर “डेथ टू अमेरिका” के नारे लगाते दिखाई देते हैं। ऐसा करके वहां देशभक्ति का माहौल बनाने की कोशिश साफ नजर आती है। इसके जरिए ईरान यह संदेश दे रहा है कि वह किसी भी सूरत में अमेरिका के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
इन रैलियों में शामिल कई लोग खुलकर कह रहे हैं कि वे देश के लिए जान देने को तैयार हैं। एक युवती तियाना ने कहा कि पूरा देश और सेना लड़ने के लिए तैयार है। उसने कहा कि अमेरिका बातचीत का दिखावा कर रहा है,लेकिन असल में वह ईरान पर दबाव बनाकर उसे कमजोर करना चाहता है।
क्या है तनाव की वजह
तनाव की सबसे बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका लगातार चाहता है कि ईरान अपने विवादित न्यूक्लियर प्रोग्राम को बंद करे। लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन और वैज्ञानिक विकास के लिए है, न कि परमाणु बम बनाने के लिए।
वहीं, ईरान के लोग भी परमाणु तकनीक को अपनी रक्षा के लिए जरूरी मानते हैं। तेहरान में अमेरिका के विरोध में हुई एक रैली में शामिल एक बुजुर्ग व्यक्ति को कुछ ऐसा ही संदेश देते देखा गया। उसने अपने पोस्टर पर लिखा कि न्यूक्लियर और मिसाइल तकनीक हमारी सीमाओं जितनी महत्वपूर्ण है,इसलिए हम इसकी रक्षा करेंगे।
ईरान के लोगों में यह भावना भी दिखाई दे रही है कि अमेरिका और इजरायल किसी भी समय फिर से हमला कर सकते हैं। कई लोगों को लगता है कि युद्धविराम ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिकेगा। कुछ युवाओं का कहना है कि ट्रंप बातचीत नहीं बल्कि 'या तो हमारी बात मानो, वरना हमला झेलो'जैसी नीति अपना रहे हैं।
महिलाओं से बच्चों तक सबको दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग
ईरान की स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अब तेहरान और दूसरे शहरों में सार्वजनिक 'गन कियोस्क' लगाए जा रहे हैं। वहां, आम नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। वानक स्क्वायर में महिलाओं को AK-47 खोलना और जोड़ना सिखाया जा रहा है। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी खाली कलाश्निकोव पकड़ाकर अभ्यास कराया जा रहा है।
ईरानी सरकारी मीडिया भी बना रहा जंग जैसा माहौल
ईरान का सरकारी मीडिया भी युद्ध जैसी तैयारी का माहौल बना रहा है। कई टीवी चैनलों पर एंकर हथियार लेकर कार्यक्रम कर रहे हैं। एक चैनल पर तो देखा गया कि एंकर ने लाइव शो के दौरान राइफल से स्टूडियो की छत में गोली चला दी। महिला एंकर भी टीवी पर हथियार पकड़े दिखाई दे रही हैं और लोगों से हथियार चलाना सीखने की अपील कर रही हैं।
सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश भी जारी
हालांकि पूरे ईरान में सिर्फ युद्ध समर्थक माहौल नहीं है। तेहरान के कुछ इलाकों में लोग अब भी सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं। पार्कों में लोग चाय पीते, किताबें पढ़ते और परिवार के साथ घूमते दिखाई देते हैं। कई लोग खुलकर 'नो टू वॉर' की बात भी कह रहे हैं। कई युवा भी यही चाहते हैं कि देश में तनाव खत्म हो और दुनिया से टकराव की राजनीति कम हो। लेकिन मौजूदा हालात में ईरान के भीतर डर,राष्ट्रवाद और युद्ध की आशंका एक साथ बढ़ती दिखाई दे रही है। सरकार समर्थित कड़ा राष्ट्रवादी संदेश लगातार तेज हो रहा है, जबकि शांति और बदलाव की मांग करने वाली आवाजें धीरे-धीरे दबती नजर आ रही हैं।
