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भारत-अमेरिका के संबंध कैसे हुए इतने मजबूत? NSA ने बताया इसे बाइडन की उपलब्धि

India-US Relations: भारत-अमेरिका के संबंध आज जिस मुकाम पर है वह बाइडन प्रशासन की अहम उपलब्धि है। ऐसा अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन का कहना है। उन्होंने कहा है कि मैं ईमानदारी से, मैं कहूंगा कि संबंध वास्तव में पिछले चार वर्षों में मजबूत होते चले गए।

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भारत-अमेरिका के संबंध पर अमेरिकी एनएसए की टिप्पणी।

World News: अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवन ने शुक्रवार को कहा कि भारत-अमेरिका संबंध आज जिस मुकाम पर है, वह बाइडन प्रशासन की एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने साथ ही स्वीकार किया कि भारत के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव भी आए, जैसे कि भारत सरकार के एक अधिकारी द्वारा एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की कथित साजिश के मुद्दे पर।

'बाइडन प्रशासन की बदौलत मजबूत हुए दोनों देशों के रिश्ते'

सुलिवन ने व्हाइट हाउस के रूजवेल्ट रूम में एक गोलमेज बैठक के दौरान संवाददाताओं से कह, ‘‘मुझे लगता है कि अमेरिका-भारत संबंध आज जिस मुकाम पर है वह इस (बाइडन) प्रशासन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में हमारे सहयोगियों और साझेदारों के बीच संबंधों की समग्र स्थिति और एकीकरण... हम अगले प्रशासन को दे रहे हैं।’’ सुलिवन इस सप्ताह की शुरुआत में नयी दिल्ली से लौटे हैं। उन्होंने अपने भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की थी।

उन्होंने बांग्लादेश में शासन परिवर्तन में अमेरिका की किसी भी भूमिका से इनकार किया। सुलिवन ने उम्मीद जताई कि खालिस्तानी चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की कोशिश का मामला अमेरिका की नयी सरकार के दौरान भी जारी रहेगा।

'चार वर्षों में मजबूत होते चले गए भारत-अमेरिका संबंध'

अमेरिकी एनएसए ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हमें इस तथ्य के बाद आगे बढ़ना था कि एक अमेरिकी नागरिक की हत्या का प्रयास किया गया। हमने उस पर काम किया है...।’’ भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले चार सालों में आए उतार-चढ़ाव के बारे में सुलिवन ने कहा,‘‘ किसी भी रिश्ते में, किसी भी दोस्ती में, व्यापार और अर्थशास्त्र के मुद्दों पर, या जी20 घोषणापत्र के शब्दों को लेकर असहमति होगी, और हमें समझौता करने और समाधान के साथ आने के लिए काम करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ईमानदारी से, मैं कहूंगा कि संबंध वास्तव में चार वर्षों में मजबूत होते चले गए।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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