रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर शायद सबसे तीखा हमला करते हुए, व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने दावा किया कि भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को 'बढ़ावा' दे रहा है। पीटर नोवारो ने आरोप लगाया कि भारत 'क्रेमलिन के लिए कपड़े धोने की मशीन' (laundromat for the Kremlin) के रूप में काम कर रहा है, उन्होंने कहा कि भारत की खरीद से रूस को यूक्रेन में अपने युद्ध प्रयासों को वित्तपोषित करने की अनुमति मिल रही है, जबकि नई दिल्ली लेनदेन से लाभ कमा रहा है।
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार ने कहा, 'लगता है भारत इस रक्तपात (bloodshed) में अपनी भूमिका स्वीकार नहीं करना चाहता... वह शी जिनपिंग (चीनी राष्ट्रपति) के साथ नज़दीकियां बढ़ा रहा है। उन्हें (भारत को) (रूसी) तेल की ज़रूरत नहीं है। यह तेल शोधन से मुनाफा कमाने की योजना है। यह क्रेमलिन के लिए एक laundromat है। मैं भारत से प्यार करता हूँ। मोदी एक महान नेता हैं, लेकिन भारत, कृपया वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका पर गौर करें। आप अभी जो कर रहे हैं, उससे शांति नहीं आ रही है। यह युद्ध को बढ़ावा दे रहा है।'
गौरतलब है कि उनके ये बयान संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली द्वारा चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के वैश्विक प्रयास में भारत को एक 'मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार" के रूप में मानने के महत्व पर ज़ोर दिए जाने के बाद आए हैं। न्यूज़वीक में अपने लेख में, उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका-भारत संबंधों में 25 साल की गति को नुकसान पहुँचाना एक 'रणनीतिक आपदा' होगी।
उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया कि वे 'इस गिरावट को रोकें' (reverse the downward spiral) और प्रधानमंत्री मोदी से सीधी बातचीत करें। उन्होंने कहा, 'जितनी जल्दी हो सके, उतना अच्छा है।हेली का मानना है कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो एशिया में चीनी प्रभुत्व का प्रतिकार कर सकता है, जिससे अमेरिका के लिए एक मज़बूत साझेदारी बनाए रखना बेहद ज़रूरी हो जाता है।'
इसके अलावा, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भारत पर भारी टैरिफ लगाने के अमेरिकी प्रशासन के फैसले की कड़ी आलोचना की है और इसे 'विचित्र' तथा 'अमेरिकी विदेश नीति के हितों के लिए आत्मघाती'बताया है।
एएनआई को दिए एक हालिया साक्षात्कार में, सैक्स ने चिंता व्यक्त की कि ये शुल्क अमेरिका-भारत संबंधों को मज़बूत करने के वर्षों के प्रयासों को कमज़ोर कर देंगे। सैक्स ने इन शुल्कों को 'रणनीति नहीं, बल्कि तोड़फोड़' और 'अमेरिकी विदेश नीति का सबसे मूर्खतापूर्ण रणनीतिक कदम' बताया, जिसने ब्रिक्स देशों को पहले से कहीं ज़्यादा एकजुट किया है।
कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया
ट्रंप ने जुलाई में भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जबकि भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की उम्मीदें थीं, जिससे अन्यथा बढ़े हुए टैरिफ से बचने में मदद मिलती। कुछ दिनों बाद, उन्होंने भारत द्वारा रूसी तेल के निरंतर आयात का हवाला देते हुए 25 प्रतिशत का और टैरिफ लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया।
