IMF Warning: ईरान- अमेरिका संघर्ष के खिंचने से IMF ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का नजरिया बदला है, अब IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि 'अगर मध्य-पूर्व का युद्ध लंबा खिंचा, तो हालात और बुरे होंगे। IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा (Kristalina Georgieva) ने कहा कि तीन हफ़्ते पहले इंटरनेशनल मॉनेटरी फ़ंड (IMF) द्वारा आर्थिक विकास के जो अनुमान लगाए गए थे, वे अब प्रासंगिक नहीं रहे, क्योंकि फारस की खाड़ी में चल रहे लंबे युद्ध का मतलब है कि विकास दर कम होगी और महंगाई ज़्यादा।
पिछले महीने अपने बहुचर्चित 'विश्व आर्थिक परिदृश्य' (World Economic Outlook) में, IMF ने एक ऐसा 'संदर्भ' परिदृश्य पेश किया था, जिसमें यह माना गया था कि युद्ध जल्द ही समाप्त हो जाएगा। लॉस एंजिल्स में मिल्केन इंस्टीट्यूट के सम्मेलन में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि अब वह बात 'बीते जमाने की बात' हो गई है।
'अगर मध्य-पूर्व में युद्ध 2027 तक खिंचता है तो...'
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की प्रमुख ने सोमवार को चेतावनी दी कि महंगाई पहले से ही बढ़ रही है, और अगर मध्य-पूर्व में युद्ध 2027 तक खिंचता है और तेल की कीमतें लगभग $125 प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) को 'बहुत बुरे नतीजों' का सामना करना पड़ सकता है।
IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि युद्ध जारी रहने का मतलब है कि ग्लोबल लेंडर का 'रेफरेंस सिनेरियो' (Reference Scenario)-जिसमें यह माना गया था कि संघर्ष कम समय तक चलेगा और जिसके तहत ग्रोथ में मामूली गिरावट (3.1%) और कीमतों में मामूली बढ़ोतरी (4.4%) का अनुमान लगाया गया था-अब संभव नहीं है।
ईरान और अमेरिका के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की शुरुआत
ईरान और अमेरिका के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी, 2026 को हुई। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) शुरू किया, जिसके तहत ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे और परमाणु केंद्रों पर लगभग 900 हवाई हमले किए गए। इन शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु भी हो गई।
