ख़ून अपना हो या पराया हो
नस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर
जंग मशरिक़ में हो कि मग़रिब में
अम्न-ए-आलम का ख़ून है आख़िर
जंग तो ख़ुद ही एक मसला है
जंग क्या मसलों का हल देगी
आग और ख़ून आज बख़्शेगी
भूक और एहतियाज कल देगी
इसलिए ऐ शरीफ़ इंसानों
जंग टलती रहे तो बेहतर है
आप और हम सभी के आँगन में
शमा जलती रहे तो बेहतर है
-साहिर लुधियानवी
7 अक्टूबर की अहले सुबह इजराइल का आसमान हमास द्वारा छोड़े गए रॉकेट्स ने पाट दिया था। हमास के आतंकी इजराइल के शहरों में घुस आए। म्युजिक फेस्टिवल अटेंड करने गए 200 से अधिक लोग मौत की चिर शांति में सो गए। औऱतें, बच्चे बंदी बना लिए गए।
इजराइल ने इंतकाम लेना शुरू किया। खून का बदला खून। और शुरू हो गई दुनिया में एक और ज़ंग। फिर तो इंसानियत का कत्लेआम रोज़ाना की ख़बरों में शुमार हो गया। बमों और रॉकेट्स ने न घर देखे, न औरत, न मर्द न बच्चे न बुजुर्ग। वो बरसते रहे और सरहद के दोनों तरफ मौत का मातम बदस्तूर जारी है। इजराइल के बच्चों की मौतों से लोग ग़मज़दा हैं तो फिलिस्तीनी बच्चों की लाशें कलेजे से लगाए मां-बाप को रोते हुए देखना भी वो दृश्य है जिसे कोई देखना नहीं चाहेगा। इजराइल के इंतकाम का शिकार बने गाजा में कम से कम 1,524 बच्चों सहित कुल 3,785 लोग मारे गए हैं। इसकी जानकारी हमास-नियंत्रित क्षेत्र में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी है।
युद्ध ज़ारी है। सायरनों का शोर मौत की मुनादी करता हुआ इजराइल और गाजा दोनों तरफ दहशत पैदा कर रहा है। जब सायरनों का शोर थमता है तब लोगों की चीखें सुनाई देती हैं। ऐसी चीखें जिससे मजबूत से मजबूत कलेजा भी कांप जाए। युद्धोन्मादी हो रहे मीडिया चैनलों से आप इस मानवीय त्रासदी का अंदाज़ा नहीं लगा पाएंगे।
कहते हैं ना जाके पांव न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई। कुछ लोग हमास और फिलिस्तीन का खात्मा चाहते हैं तो कुछ इजराइल का। वो लोग जो ये नहीं बता पाएंगे कि इजराइल और फिलिस्तीन ग्लोब में किस तरफ पड़ेंगे वो भी युद्धोउन्माद की भाषा में नारे बुलंद कर रहे हैं।
गाजा के अल अहली अस्पताल में हमलों में घायल लोग इलाज करा रहे थे। कम से कम अस्पताल में इंसान बमों और रॉकेट्स के हमले से मरने तो नहीं जाता। लेकिन युद्ध हर नाजायज को जायज ठहराने की सनक का ही नाम है। अस्पताल पर बम गिरे, रॉकेट्स छोड़े गए और 500 लोगों की मौत हो गई। जो अस्पताल घायलों की जान बचा रहा था वो अचानक से लाशों के ढेर में बदल गया। इजराइल और फिलिस्तीन दोनों ने एक दूसरे पर अस्पताल पर हमले का आरोप लगाया। लेकिन सच जो भी हो वो 500 ज़िंदगियां जा चुकी हैं। ऐसी न जाने कितनी ज़िंदगियां हैं जो जाने वाली हैं। हमास के हमले में आम इजराइली मारे गए थे। तो इजराइल के हमलों में भी आम फिलिस्तीनी मारे जा रहे हैं। तर्क शास्त्र के जानकार युद्ध का तर्क जुटा ही लेंगे। लेकिन बेकसूर लोगों और मासूम बच्चों के नरसंहार को कोई तर्क सही नहीं ठहरा सकता। इसलिए जैसा साहिर ने कहा है, ऐ शरीफ इंसानों जंग टलती रहे तो बेहतर है। आप और हम सभी के आंगन में शम्मा जलती रहे तो बेहतर है।
Reported By- Adarsh Shukla
