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हिजबुल्लाह के नए 'चीफ' का ऐलान, नसरल्लाह की मौत के बाद कमान संभालेगा हाशिम सफीउद्दीन

Hezbollah New Chief: हसन नसरल्लाह की मौत के बाद हिजबुल्लाह की ओर से नए नेता का ऐलान कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, नसरल्लाह का चचेरा भाई हाशिम सफीउद्दीन अब हिजबुल्लाह की कमान संभालेगा।

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हाशिम सफीउद्दीन संभालेगा हिजबुल्लाह की कमान।

Photo : Twitter

Hezbollah New Chief: हसन नसरल्लाह की मौत के बाद हिजबुल्लाह की ओर से नए नेता का ऐलान कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, नसरल्लाह का चचेरा भाई हाशिम सफीउद्दीन अब हिजबुल्लाह की कमान संभालेगा। हाशिम सफीउद्दीन हिजबुल्लाह के राजनीतक मामलों को देखता आया है, इसके साथ ही वह एग्जीक्यूटिव काउंसिल और जिहाद काउंसिल का प्रमुख भी है।

मिली जानकारी के अनुसार, हाशिम सफीउद्दीन का जन्म 1964 में दक्षिणी लेबनान के दीर कानून एन नाहर में हुआ था। वह लेबनानी शिया मौलवी और हिजबुल्लाह का सीनियर लीडर भी है। हाशिम हमेशा काली पगड़ी पहनता है और उसे अमेरिका ने आतंकवादी घोषित कर रखा है।

खुद को बताता है पैगम्बर मोहम्मद का वंशज

हाशिम सैफउद्दीन खुद को पैगम्बर मोहम्मद का वंशज बताता है और वह शिया मौलवी भी है। जानकारी के मुताबिक, हिजबुल्लाह के सैन्य और रणनीतिक अभियानों में सैफउद्दीन का अच्छा खास प्रभाव था और हिजबुल्लाह में उसकी गिनती नसरल्लाह और नईम कासिम के बाद होती थी। उसे शुरुआत से ही हिजबुल्लाह का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है।

इजराइल के टारगेट पर है हाशिम

नसरल्लाह की मौत के बाद अब इजराइल के टारगेट पर हाशिम सैफउद्दीन है। बताया जा रहा है कि फिलहाल वह इजराइल के हमलों से बचने के लिए भागता फिर रहा है और हर रोज अपनी लोकेशन बदल रहा है। बता दें, शुक्रवार को इजराइल ने लेबनान के बेरूत में कुछ इमारतों को निशाना बनाया था, इनमें वह इमारत भी शामिल थी, जहां नसरल्लाह ठहरा हुआ था। हमले के कुछ घंटो बाद इजराइली सेना ने नसरल्लाह की मौत की पुष्टि कर दी थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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