यूरोपीय यूनियन ने मोबाइल के साथ साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक चार्जरों को लेकर एक ऐसा कानून बना दिया है, जिससे पूरी दुनिया में बदलाव आ सकता है। इस कानून से सबसे ज्यादा घाटा एप्पल को होने वाला है।
यूरोपीय संसद ने मंगलवार को इस नए नियम की मंजूरी दी है। इस कानून के तहत यूरोपीय देशों में मोबाइल फोन, टैबलेट और कैमरों के लिए एक ही टाइप का चार्जर होगा। कानून के अनुसार 2024 तक सभी कंपनियों को चार्जर सी टाइप का करना अनिवार्य होगा।
इस समय एप्पल को छोड़कर मुख्य मोबाइल कंपनियां सी-टाइप चार्जर ही मार्केट में मोबाइल के साथ ला रही है। प्रमुख मोबाइल कंपनियों में एप्पल ही एक है, जिसका चार्जर सबसे अलग होता है। इसके चार्जर की कीमत भी अधिक होती है। भारत जैसे देश में इसके चार्जर की कीमत में और दूसरे मोबाइल कंपनियों के चार्जर की कीमत में काफी अंतर होता है।
एप्पल को नुकसान
यूरोपीय यूनियन में कुल 27 देश हैं। इन देशों में एप्पल के प्रोडक्ट की काफी डिमांड भी है। अब इस कानून के बाद से एप्पल को अपने चार्जर में बदलाव लाना पड़ेगा या फिर इन देशों में एक अलग से कनेक्टर देना होगा। हालांकि इसकी उम्मीद कम ही है। कहा जा रहा है कि एप्पल अपने चार्जर में ही बदलाव लाएगा। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारत पर असर
भले ही यह कानून यूरोपीय देशों के लिए आया हो, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अगर एप्पल अपने चार्जर में बदलाव करता है तो सभी देशों के प्रोडक्ट्स के लिए एक ही तरह के चार्जर बनाएगा, यानि कि सी-टाइप। ऐसे में भारत के बाजारों से भी एप्पल के खास चार्जर गायब हो जाएंगे और उसकी जगह सी टाइप चार्जर ले लेंगे।
