Iran enriched uranium : युद्ध रोकने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच किसी समझौते की संभावनाएं कमजोर होती जा रही हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुख्य मांग पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई ने अपने रुख कड़ा कर लिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान के दो सूत्रों के हवाले से कहा कि सुप्रीम लीडर ने जारी शांति वार्ता में शामिल ट्रंप की मुख्य मांग मानने से इंकार कर दिया है। मोजतबा ने अपने आदेश में कहा है कि 'संवर्धित यूरेनियम ईरान से बाहर नहीं जाना चाहिए।' बताया जाता है कि ईरान के पास अभी भी 400 किलो से ज्यादा संवर्धित यूरेनियम है और यह 60 फीसदी तक संवर्धित है। ट्रंप की मुख्य मांगों में इस संवर्धित यूरेनियम को ईरान से बाहर भेजना शामिल है। इसके अलावा ट्रंप ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक भी चाहते हैं।
नेतन्याहू ने भी अपनाया कड़ा रुख
मोजतबा का यह रुख ऐसे समय आया है जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जोर देकर कहा है कि संवर्धित यूरेनियम को ईरान से जब तक पूरी तरह निकाल नहीं लिया जाता, तब तक वह युद्ध खत्म करने के बारे में नहीं सोचेंगे। इसके अलावा नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान को अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सीज को वित्तीय एवं हथियारों से मदद करनी बंद करनी होगी। साथ ही उसे अपनी बैलिस्टिक मिसाइल संरचनाओं को पूरी तरह से खत्म करना होगा।
ट्रंप और नेतन्याहू में तीखी बहस हुई
इस बीच रिपोर्ट यह भी है कि ईरान युद्ध खत्म करने को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू में तीखी बहस हुई है। अमेरिकी मीडिया संस्थान 'एक्सियोस’ ने बुधवार को अपनी खबर में कहा कि मंगलवार को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू 'बेहद खफा थे’। खबर में कहा गया कि इजराइली प्रधानमंत्री ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करने तथा उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर शासन को कमजोर करने के लिए दोबारा हमले शुरू करने के पक्ष में हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा था कि उन्होंने मंगलवार के लिए निर्धारित ईरान पर हमले की योजना को टाल दिया है। उन्होंने कहा कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अरब देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया।
संशोधित शांति मसौदा तैयार
'एक्सियोस’ की खबर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम करने के उद्देश्य से कतर और पाकिस्तान ने अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के सुझावों के साथ एक संशोधित शांति मसौदा तैयार किया है। खबर में कहा गया है कि नेतन्याहू को बातचीत की प्रक्रिया को लेकर संशय और उनका मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत को और कमजोर करने के लिए युद्ध फिर से शुरू किया जाना चाहिए। वहीं, ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है, लेकिन यदि कोई सहमति नहीं बनती तो वह युद्ध दोबारा शुरू करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बुधवार को ’कोस्ट गार्ड’ अकादमी में कहा, "अब सवाल सिर्फ यह है कि क्या हम वहां जा कर इसे पूरी तरह खत्म करेंगे या फिर वे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे। देखते हैं क्या होता है।"
