दुनिया

एलन मस्क ने भारत को सराहा, अमेरिका पर कसा तंज; जानें आखिर क्या है माजरा

World News: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भारत के तारीफ में पुल बांधे हैं। टेस्ला के सीईओ मस्क ने एक दिन में 640 मिलियन वोटों की गिनती के लिए भारत की सराहना की है। इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका पर तंज भी कसा है। आपको बताते हैं कि उन्होंने क्या कुछ कहा।

Image

एलन मस्क ने अमेरिका पर कसा तंज

Elon Musk praised India: टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने दो राज्य विधानसभा चुनावों और उपचुनावों की मतगणना एक ही दिन में संपन्न होने के बाद भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना की है। साथ ही उन्होंने अमेरिका की इस प्रक्रिया पर कटाक्ष भी किया, जहां कैलिफोर्निया में अभी तक मतदान की घोषणा नहीं हुई है।

एलन मस्क ने वोटों की गिनती के लिए भारत की तारीफ की

मस्क ने एक्स पर लिखा, 'भारत ने एक दिन में 640 मिलियन वोटों की गिनती कर ली है, जबकि कैलिफोर्निया अभी भी वोटों की गिनती कर ही रहा है।" मस्क ने ये टिप्पणी उस एक्स पोस्ट पर दी जिसका शीर्षक था कि भारत ने एक दिन में 640 मिलियन वोटों की गिनती की। मस्क ने ऐसे ही एक दूसरी पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उस पोस्ट में लिखा था कि भारत ने एक दिन में 640 मिलियन वोट गिने और कैलिफोर्निया 18 दिन बाद भी 15 मिलियन वोट नहीं गिन पाया है। इस पर मस्क ने लिखा- दुखद।

कैलिफोर्निया में अभी भी मतों की गिनती होनी बाकी

खबरों की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव संपन्न होने के 2 हफ्ते बाद भी कैलिफोर्निया में अभी भी 300,000 से अधिक मतों की गिनती होनी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी चुनावों का विजेता घोषित किए हुए कई सप्ताह हो चुके हैं। ट्रंप अब जनवरी अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

कैलिफोर्निया अमेरिका का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जहां लगभग 39 मिलियन निवासी रहते हैं। 5 नवंबर को हुए मतदान में कम से कम 16 मिलियन मतदाताओं ने भाग लिया। हालांकि, हाल के वर्षों में यह चुनाव परिणामों की गणना और रिपोर्ट करने में सबसे धीमे राज्यों में से एक रहा है। देरी मुख्य रूप से इसके विशाल आकार और मेल-इन वोटिंग के कारण है।

कैलिफोर्निया के चुनाव मुख्य रूप से मेल-इन वोटिंग पर निर्भर

चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मतदान की घोषणा करने में कई सप्ताह लग सकते हैं, ऐसा ही कुछ 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हुआ था। कैलिफोर्निया के चुनाव मुख्य रूप से मेल-इन वोटिंग पर निर्भर करते हैं, जिसके लिए व्यक्तिगत मतदान की तुलना में प्रक्रिया करने में अधिक समय और प्रयास की आवश्यकता होती है। प्रत्येक मेल-इन मतपत्र को व्यक्तिगत सत्यापन और प्रोसेसिंग से गुजरना पड़ता है, एक ऐसी प्रक्रिया जो मतदान केंद्रों पर मतपत्रों को स्कैन करने की तुलना में अधिक समय लेती है।

यह पहली बार नहीं है जो मस्क ने भारत को सराहा है। इससे पहले 17 अक्टूबर को, मस्क ने नीलामी के बजाय प्रशासनिक रूप से सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करने के भारतीय सरकार के फैसले की सराहना की थी। मस्क ने एक्स पर लिखा था, " सराहनीय कदम। हम भारत के लोगों की सेवा करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे।" मस्क दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि भारत सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम (एयरवेव) का आवंटन प्रशासनिक तरीके से करेगा, न कि नीलामी के माध्यम से।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article