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रामायण-महाभारत जैसे महाकाव्य से निकले हैं ये देसी मुहावरे, ज्यादातर नहीं जानते इनका मतलब

रामायण के पात्र, प्रसंग और प्रतीक सदियों से हमारी लोकभाषा का हिस्सा बनते रहे हैं। यही बात महाभारत पर भी लागू होती है।

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रामायण महाभारत से निकले मुहावरे

हम रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे कई मुहावरे बोलते हैं, जिनका रिश्ता सीधे रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों से है। दिलचस्प बात यह है कि इन्हें इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि इनकी शुरुआत आखिर कहां से हुई।

रामायण के पात्र, प्रसंग और प्रतीक सदियों से हमारी लोकभाषा का हिस्सा बनते रहे हैं। यही बात महाभारत पर भी लागू होती है। आइए डालते हैं एक नजर ऐसे कुछ मशहूर मुहावरों पर जो इन महाकाव्यों की देन हैं:

1. घर का भेदी लंका ढाए

मतलब: अपना ही व्यक्ति सबसे बड़ा नुकसान पहुंचा दे।

इसका संबंध रामायण के उस प्रसंग से है, जब विभीषण ने रावण का साथ छोड़ श्रीराम का साथ दिया और लंका की कई महत्वपूर्ण जानकारियां उन्हें दीं।

2. अंगद का पैर

मतलब: अपने निर्णय पर अटल रहना या जिसे कोई हिला न सके।

रामायण में जब श्रीराम ने अंगद को शांति प्रस्ताव लेकर रावण के दरबार भेजा, तब अंगद ने अपना पैर सभा के बीच जमा दिया और चुनौती दी कि यदि कोई उसे हिला दे, तो श्रीराम वापस लौट जाएंगे। रावण के बड़े-बड़े योद्धा भी उनका पैर नहीं हिला सके।

3. चक्रव्यूह में फंसना

मतलब: ऐसी जटिल परिस्थिति में फंस जाना, जहां से निकलना कठिन हो।

यह मुहावरा सीधे महाभारत से आया है। युद्ध के दौरान अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो जानते थे, लेकिन उससे बाहर निकलने की पूरी विधि नहीं जानते थे। नतीजा ये हुआ कि वे उसमें घिर गए। आज जब कोई व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों में उलझ जाता है, तो कहा जाता है कि वह चक्रव्यूह में फंस गया है।

4. लक्ष्मण रेखा

मतलब: ऐसी सीमा जिसे पार नहीं करना चाहिए।

रामकथा के अनुसार, वनवास के दौरान लक्ष्मण ने सीता की सुरक्षा के लिए कुटिया के बाहर एक रेखा खींची थी। हालांकि वाल्मीकि रामायण में लक्ष्मण रेखा का उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन बाद की रामायणों और लोककथाओं में यह प्रसंग इतना लोकप्रिय हुआ कि आज लक्ष्मण रेखा हर तरह की मर्यादा और सीमा का प्रतीक बन चुका है।

5. रामबाण इलाज

मतलब: ऐसा उपाय जो निश्चित रूप से सफल हो।

यह मुहावरा भगवान राम के उन बाणों की अचूकता से जुड़ा माना जाता है, जो अपने लक्ष्य को कभी नहीं चूकते थे। आज भी किसी प्रभावी समाधान को रामबाण उपाय कहा जाता है।

6. शकुनि की चाल

मतलब: बहुत चालाकी या षड्यंत्रपूर्ण योजना।

महाभारत में शकुनि अपनी कूटनीति और पासों के खेल के लिए प्रसिद्ध था। इसलिए आज भी किसी धूर्त योजना को शकुनि की चालकहा जाता है।

7. वनवास झेलना

मतलब: लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहना।

श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास ने इस शब्द को भारतीय समाज में संघर्ष, धैर्य और त्याग का प्रतीक बना दिया। आज भी जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक कठिन दौर से गुजरता है, तो कहा जाता है कि वह वनवास झेल रहा है।

मुहावरे और लोकोक्तियां किसी भाषा की सांस्कृतिक स्मृति होती हैं। ये समाज के अनुभव और इतिहास को अपने भीतर संजोए रखते हैं। यही कारण है कि रामायण और महाभारत हमारी रोजमर्रा की बातचीत, मुहावरों और सोचने के तरीके में भी जीवित हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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