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Earthquake: शक्तिशाली भूकंप के झटकों से हिला ताइवान, 6.3 रही तीव्रता

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 18, 2023, 10:17 PM IST

Earthquake: ताइवान से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां 6.3 तीव्रता के झटके महसूस किए गए हैं। ताइवान में इससे पहले 21 मार्च को पूर्वी तट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। तब भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 मापी गई थी।

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ताइवान में भूकंप के झटके

Photo : ANI

Earthquake: ताइवान से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, ताइवान के पूर्वोत्तर में 6.3 तीव्रता के झटके महसूस किए गए हैं। अभी तक किसी प्रकार के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।

भूकंप के कारण ताइवान की कई इमारतें हिल गईं, जिसके बाद डर से लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने बताया कि भूकंप की गहराई 171 किलोमीटर(106.25) मील थी। बता दें, ताइवान में इससे पहले 21 मार्च को पूर्वी तट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। तब भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 मापी गई थी।

मोरक्कों में हुई थी 3000 की मौत

इससे पहले हाल ही में अफ्रीकी देश मोरक्कों में शक्तिशाली भूकंप आया था। यहां भूकंप की तीव्रता 6.8 थी, जिस कारण कई इमारतें तबाह हो गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मोरक्को में करीब 300 हजार लोगों की मौत हो गई। यहां सैंकड़ों इमारतें भी मलबे में तब्दील हो गई थीं। वैज्ञानिकों ने बताया कि एटलस पहाड़ मोरक्को, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया तक भूकंप का केंद्र था।

तुर्की में हुई थी भयानक तबाही

बता दें, इसी साल तुर्की में भयानक भूकंप आया था। यहां भूकंप की तीव्रता 7.8 मैग्नीट्यूड थी। इस भूकंप के कारण तुर्किए में 45 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे, इतना ही नहीं हजारों इमारतें ध्वस्त हो गई थीं। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एरडोगन ने बताया था कि 6 फरवरी को आए भूकंप के कारण 104 बिलियन डॉलर का नुकसान हो गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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