Donald Trump Iran Threat: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए स्विट्जरलैंड में इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक (Switzerland US Iran meeting) में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित दुनिया के कई शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन इस शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने माहौल को और गर्मा दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए ईरान को सीधी धमकी दी है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी (समर्थित गुटों) को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना चाहिए। ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, "अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बल्कि इस बार हमला उससे भी ज्यादा जोरदार होगा।"
ईरान की शर्तें
इस बातचीत के दौरान दोनों देशों की प्राथमिकताएं बिल्कुल अलग-अलग नजर आ रही हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई के मुताबिक, ईरान के लिए सबसे बड़ा मुद्दा लेबनान में जारी इजरायली हमले हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लेबनान में सीजफायर लागू करवाने में पूरी तरह नाकाम रहा है, जो शांति समझौते की पहली शर्त थी। इसके अलावा ईरान चाहता है कि उस पर से तेल बेचने के प्रतिबंध हटाए जाएं और कतर के बैंक में फंसे उसके 6 अरब डॉलर ($6 Billion) के फंड को जल्द से जल्द रिलीज किया जाए।
अमेरिका क्या चाहता है?
दूसरी तरफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी टीम का पूरा ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोकने पर केंद्रित है। वाशिंगटन चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक ईरान के परमाणु ठिकानों का दौरा कर वहां की जमीनी हकीकत की जांच करें। अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान इसके लिए तैयार होता है, तभी उसके फंड को रिलीज करने पर विचार किया जाएगा। इस बातचीत के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी विवाद जारी है। लेबनान पर हमलों के विरोध में ईरान ने इसे बंद करने की धमकी दी है, जबकि ट्रंप का दावा है कि यह जलमार्ग खुला हुआ है।
