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क्या रूस ने ईरान को सऊदी अरब में अमेरिकी बेस पर हमला करने में मदद की? युद्ध के बीच जेलेंस्की का बड़ा दावा

Iran WAR: यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया कि सऊदी अरब में अमेरिकी अड्डे पर मिसाइल हमले से पहले रूस ने ईरान के साथ सैटेलाइट से मिली जानकारी साझा की थी, जिस हमले में अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। हालांकि, अमेरिका ने इनकार किया कि कोई सैनिक घायल नहीं हुआ।

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क्या रूस ने ईरान को सऊदी अरब में अमेरिकी बेस पर हमला करने में मदद की?

Russia Helps Iran in US War: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार (28 मार्च) को दावा किया कि ईरान द्वारा सऊदी अरब में एक अमेरिकी एयर बेस पर हमला करने से ठीक एक दिन पहले, रूस ने उस जगह की तीन बार सैटेलाइट तस्वीरें ली थीं। ईरान के इस हमले में अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे। हालांकि, अमेरिका ने कहा कि कोई सैनिक घायल नहीं हुआ। जेलेंस्की ने आगे कहा कि उनका मानना है कि ईरानियों की मदद करना मॉस्को के ही हित में था। उन्होंने कहा कि उन्हें '100 प्रतिशत' यकीन है कि रूस, चल रहे युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं को निशाना बनाने में मदद करने के लिए तेहरान के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा कर रहा है।

यह दावा तब सामने आया जब ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों की एक लहर ने सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला किया, जिसमें दस अमेरिकी सैनिक घायल हो गए और अमेरिका के कई महत्वपूर्ण रीफ्यूलिंग विमानों को नुकसान पहुंचा। इस जानलेवा हमले में दो अमेरिकी सैनिक बहुत बुरी तरह घायल हो गए, जबकि बाकी आठ सैनिकों को गंभीर चोटें आईं। रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में मानवरहित हवाई वाहन, या ड्रोन भी शामिल थे।

रूस ईरानियों की मदद...

जेलेंस्की ने NBC News को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'मुझे लगता है कि ईरानियों की मदद करना रूस के ही हित में है। और मुझे सिर्फ ऐसा लगता ही नहीं, बल्कि मुझे पक्का पता है कि वे आपस में जानकारी साझा करते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'क्या वे ईरानियों की मदद करते हैं? बिल्कुल। कितने प्रतिशत? सौ प्रतिशत।'

यूक्रेनी जासूसी एजेंसियों से मिली रोजाना की प्रेसिडेंशियल ब्रीफिंग का सारांश बताते हुए जेलेंस्की ने कहा कि रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी सैटेलाइट्स ने 20 मार्च, 23 मार्च और 25 मार्च को सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस की तस्वीरें ली थीं। इस बेस पर, जहां US और सऊदी, दोनों देशों के सैनिक तैनात हैं, यहां 26 मार्च को हमला हुआ था।

जेलेंस्की ने आगे कहा कि यूक्रेन के अनुभव के अनुसार, रूस द्वारा कई दिनों तक लगातार इन ठिकानों की तस्वीरें लेना हमले की योजना बनाने का संकेत है।

उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि अगर वे एक बार तस्वीरें लेते हैं, तो वे तैयारी कर रहे होते हैं। अगर वे दूसरी बार तस्वीरें लेते हैं, तो यह एक तरह का सिमुलेशन होता है। तीसरी बार का मतलब है कि एक या दो दिन में वे हमला कर देंगे।'

वॉशिंगटन पोस्ट ने पहले रिपोर्ट दी थी कि रूस इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के बारे में ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा था। रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया ब्रीफिंग के सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि रूस द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी में सैटेलाइट तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी सैनिकों, जहाजों और विमानों के स्थान और उनकी गतिविधियों को दिखाया गया है, जिन्हें शेयर किया जाता है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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