Countries Without Airports: जरा सोचिए कोई ऐसा देश, जो प्राकृतिक सुंदरता में बेहद खास हो, लेकिन वहां खुद का एयरपोर्ट ही न हो। ऐसे में पहला सवाल यही उठता है कि वहां के लोग आवाजाही कैसे करते होंगे और बाहरी लोग वहां तक कैसे पहुंचते होंगे। दरअसल, कुछ देशों में एयरपोर्ट नहीं होते, इसलिए यात्रियों को पास के किसी दूसरे शहर के एयरपोर्ट पर उतरना पड़ता है और फिर आगे की दूरी सड़क या समुद्री मार्ग से तय की जाती है। इन देशों में परिवहन की यही व्यवस्था लंबे समय से अपनाई जा रही है और प्रशासन इसी सिस्टम के जरिए लोगों की आवाजाही और जरूरी सेवाओं को संभालता है। ऐसे में आइए जानें इन दिलचस्प और अनोखे देशों के बारे में।

बिना एयरपोर्ट वाले देश
दुनिया के ऐसे देश जिनके पास एयरपोर्ट नहीं है
एंडोरा
यह छोटा-सा देश फ्रांस और स्पेन के बीच स्थित पिरेनीज पर्वतों में बसा हुआ है। पहाड़ों से घिरा होने के कारण यहां अपना कोई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा नहीं है। एंडोरा पहुंचने के लिए लोग आमतौर पर पहले फ्रांस के टूलूज या स्पेन के ला सेऊ डी उरगेई एयरपोर्ट पर उतरते हैं और फिर सड़क मार्ग से आगे की यात्रा करते हैं। स्कीइंग के शानदार अवसर और ड्यूटी-फ्री खरीदारी की वजह से यह जगह काफी लोकप्रिय है। वीजा सिस्टम की बात करें तो एंडोरा का अलग से वीजा सिस्टम नहीं है। भारतीय यात्रियों को इसके लिए अलग वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन चूंकि यह देश शेंगेन क्षेत्र के बीच मौजूद है, इसलिए वहां जाने के लिए मान्य शेंगेन वीजा आवश्यक होता है।
मोनाको
फ्रेंच रिविएरा के तट पर बसा मोनाको दुनिया के सबसे छोटे स्वतंत्र देशों में से एक है। यहां स्वयं का कोई हवाई अड्डा नहीं है, इसलिए आमतौर पर यात्री पहले फ्रांस के नाइस एयरपोर्ट तक पहुंचते हैं और फिर वहां से सड़क या हेलिकॉप्टर के जरिए मोनाको में प्रवेश करते हैं। अपनी भव्य जीवनशैली, मशहूर कैसीनो, फॉर्मूला-1 ग्रां प्री और आलीशान अनुभवों के कारण यह स्थान दुनिया भर में चर्चित है। जहां तक वीजा का सवाल है, मोनाको अलग से वीजा जारी नहीं करता। फ्रांस के साथ इसकी घनिष्ठ व्यवस्था के कारण यहां आने-जाने के लिए वही नियम लागू होते हैं जो फ्रांस के वीजा पर लागू होते हैं।लिकटेंस्टीन
यह छोटा-सा देश ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच बसा है और चारों ओर से भूमि से घिरा होने के कारण यहां समुद्री तट भी नहीं है। यहां अपना कोई हवाईअड्डा नहीं है। सबसे नजदीकी बड़ा एयरपोर्ट स्विट्जरलैंड के जयूरिख शहर में स्थित है, जो करीब 120 किलोमीटर दूर पड़ता है। अच्छी सड़क और रेल कनेक्टिविटी की वजह से यहां तक पहुंचना सुविधाजनक माना जाता है। वीजा नियमों के अनुसार, यदि आप शेंगेन क्षेत्र में यात्रा, काम-काज या अपने परिचितों से मिलने के लिए 90 दिन तक रहना चाहते हैं, तो Schengen C-Visa की आवश्यकता होती है। वहीं, 90 दिनों से अधिक रहने की योजना होने पर D-Visa (National Visa) लेना अनिवार्य होता है।

वेटिकन सिटी
वेटिकन सिटी
दुनिया के सबसे छोटे स्वतंत्र देश वेटिकन सिटी में भी अपना हवाई अड्डा नहीं है। यह इटली की राजधानी रोम के भीतर स्थित है। यहां आने वाले यात्री आम तौर पर रोम के किसी भी हवाईअड्डे पर उतरते हैं और फिर सड़क मार्ग या पैदल चलते हुए वेटिकन परिसर तक पहुंच जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां मौजूद सेंट पीटर्स बेसिलिका और सिस्टीन चैपल जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को देखने के लिए आते हैं। प्रवेश नियमों की बात करें तो वेटिकन के लिए अलग वीजा जारी नहीं किया जाता। यहां आने के लिए मान्य शेंगेन वीजा पर्याप्त माना जाता है।
सैन मैरीनो
सैन मैरीनो दुनिया के सबसे प्राचीन गणराज्यों में गिना जाता है। यह पूरी तरह इटली से घिरा हुआ है और यहां स्वयं का कोई हवाईअड्डा नहीं है। इसके निकटतम एयरपोर्ट इटली के रिमिनी शहर में स्थित है, जो बहुत ज्यादा दूर नहीं पड़ता। ऊंचाई पर बने इसके ऐतिहासिक किले और पुराना शहर यहां आने वालों को खासा आकर्षित करते हैं। वीजा नियम के लिहाज से सैन मैरीनो की अलग वीजा व्यवस्था नहीं है। भारतीय यात्रियों के लिए यहां प्रवेश तभी संभव है जब उनके पास मान्य इतालवी वीजा या शेंगेन वीजा हो, क्योंकि इस देश तक पहुंचने का मार्ग इटली के जरिए से ही जाता है।
