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अमेजन के जंगल में हुआ चमत्कार, बीज और फल खाकर 40 दिनों तक जिंदा रहे 4 बच्चे

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Jun 12, 2023, 11:55 AM IST

Colombia plane crash : ये चारों बच्चे हुइतोतो समुदाय के हैं जिनकी उम्र 13, नौ, चार साल और 11 महीने है। ये बच्चे अपनी मां के साथ एक मई को अपने गांव आराराकुआरा से सैन जोस डेल ग्वाविआरे जा रहे थे तभी प्लेन अमेजन के जंगल में दुर्घटना का शिकार हो गया। इस हादसे में बच्चों की मां और दोनों पायलट की मौत हो गई लेकिन चारों बच्चे बच गए।

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एक मई को प्लेन हादसे का शिकार हुआ।

Photo : AP

Colombia plane crash : कहा जाता है कि 'जाको राखे साइयां मार सके न कोय', यह कहावत कोलंबिया में अमेजन के जंगल में एक बार फिर चरितार्थ हुई है। यहां प्लेन क्रैश के बाद उसमें सवार चार बच्चे हादसे के 40 दिन बाद जिंदा मिले। अमेजन के खतरनाक जंगल में मौसम की विपरीत दशाओं में इन्होंने खुद को जिंदा और सुरक्षित रखा। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। बच्चों को ढूंढने के लिए कोलंबिया सरकार ने अमेजन के जंगलों में एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को ये बच्चे सुरक्षित एवं जीवित मिले।

1 मई को दुर्घटना का शिकार हुआ प्लेन

ये चारों बच्चे हुइतोतो समुदाय के हैं जिनकी उम्र 13, नौ, चार साल और 11 महीने है। ये बच्चे अपनी मां के साथ एक मई को अपने गांव आराराकुआरा से सैन जोस डेल ग्वाविआरे जा रहे थे तभी प्लेन अमेजन के जंगल में दुर्घटना का शिकार हो गया। इस हादसे में बच्चों की मां और दोनों पायलट की मौत हो गई लेकिन ये चारों बच्चे बच गए। चिकित्सकीय उपचार एवं निगरानी के बाद बच्चों को उनके परिवार को सौंप दिया गया है।

बच्चों का जिंदा रहना चमत्कार

दुनिया भर में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। लोग बच्चों के हौसलों की तारीफ कर रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि 40 दिनों तक बच्चों ने क्या खाकर खुद को सुरक्षित एवं जीवित रखा। रिपोर्टों में बताया गया है कि बच्चों ने जंगल में बीज, पेड़ों की जड़ एवं पौधों को खाकर खुद को जीवित रखा। बच्चे ये जानते थे कि कौन से जंगली पौधे एवं बीज को खाया जा सकता है। परिवार ने जंगल एवं उसके परिवेश के बारे में उन्हें बचपन से बताया था। ये जानकारी उनके काम आई।

'मां की कोख से जंगल के बारे में जाना'

नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिगनस पीपुल्स ऑफ कोलंबिया (OPIAC) ने कहा, 'बच्चों का जीवित बचना नैसर्गिक पर्यावरण के साथ उनके रिश्ते एवं इसके बारे में उनकी समझ को बताता है। पर्यावरण के बारे में उन्हें यह सीख अपनी मां की कोख से मिली।'

बच्चों को पता था कि जंगल में क्या खा सकते हैं

बच्चों के दादा जो इन्हें 'जंगल-झाड़ियों के बच्चे' के रूप में बुलाते हैं, उनका कहना है कि हादसे के बाद इन बच्चों ने प्लेन में रखे यूका फ्लोर को खाया। तलाशी अभियान के दौरान हेलिकॉप्टर से गिराई गई खाद्य सामग्री भी इनके काम आई। ओएनआईसी ने कहा कि बच्चों ने बीज, फल, जड़ें एवं पौधों को खाया। अमेजन इलाके में रहने की वजह से इन्हें पता था कि जंगल में क्या खाया जा सकता है।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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