भारत की मेजबानी में सितंबर में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर पड़ोसी देश चीन ने अपना सकारात्मक रुख तो दिखाया है, लेकिन एक अहम सवाल पर सस्पेंस अभी भी कायम रखा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह भारत की अध्यक्षता में इस सम्मेलन को पूरी तरह से सफल बनाने का समर्थन करता है। हालांकि, जब यह पूछा गया कि क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बैठक में हिस्सा लेने खुद भारत आएंगे, तो चीन ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने ब्रिक्स को उभरते बाजारों और विकासशील देशों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच करार दिया। उन्होंने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग को काफी महत्व देता है और इसमें हमेशा सक्रिय भूमिका निभाता आया है। भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है।
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लेकिन जब मीडिया ने चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा और उपस्थिति को लेकर सवाल दागा, तो प्रवक्ता ने टालमटोल वाला रवैया अपनाया। उन्होंने बस इतना कहा कि उनके पास फिलहाल इस संबंध में साझा करने के लिए कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हाल ही में बीजिंग का दौरा किया और चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से द्विपक्षीय बातचीत की। इस मुलाकात के संबंध में चीनी प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के बीच उप-मंत्री और विदेश सचिव स्तर की इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई।
बैठक में दोनों पक्षों ने अपने शीर्ष नेताओं के बीच बनी आम सहमति को लागू करने, आपस में राजनीतिक विश्वास मजबूत करने, सीमा और अन्य विवादों का उचित समाधान निकालने और भारत-चीन संबंधों को स्थिर दिशा में आगे बढ़ाने पर अपने विचार साझा किए। अब देखना यह होगा कि कूटनीतिक बातचीत के इस दौर के बीच शी चिनफिंग भारत आने का फैसला लेते हैं या नहीं।
