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India-China Relations: दोस्ती को लेकर ढोंग कर रहा ड्रैगन! भारत के खिलाफ फिर क्यों WTO पहुंचा चीन?

चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे लेकर बयान भी जारी किया है। इसमें चीन ने कहा कि भारत के ये उपाय कथित तौर पर डब्ल्यूटीओ के कई प्रावधानों का उल्लंघन करते है। इनमें राष्ट्रीय उपचार का सिद्धांत भी शामिल है।

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जिनपिंग और पीएम मोदी (AP)

चीन एक तरफ तो भारत से रिश्ते सुधारने और सहयोग की बातें करता है, लेकिन दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार मोर्चा खोल रहा है। अब इस साल एक बार फिर ड्रैगन ने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) का दरवाजा खटखटाया है। यहां चीन ने भारत की सीमा-शुल्क और सौर क्षेत्र को सब्सिडी को लेकर नई याचिका दायर की है। इस याचिका में चीन ने परामर्श की मांग रखी है।

वाणिज्य मंत्रालय ने जारी किया बयान

चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे लेकर बयान भी जारी किया है। इसमें चीन ने कहा कि भारत के ये उपाय कथित तौर पर डब्ल्यूटीओ के कई प्रावधानों का उल्लंघन करते है। इनमें राष्ट्रीय उपचार का सिद्धांत भी शामिल है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि भारत के ये कदम आयात-प्रतिस्थापन सब्सिडी की श्रेणी में आते हैं जो डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित हैं। ये भारत के घरेलू उद्योगों को अनुचित रूप से प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करते हैं और चीन के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके साथ ही चीन ने भारत से अपने डब्ल्यूटीओ दायित्वों का सम्मान करने और इन उपायों में शीघ्र संशोधन करने का आग्रह किया है।

परामर्श प्रक्रिया में क्या होता है?

परामर्श प्रक्रिया के तहत भारत और चीन आपस में बातचीत करके समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। अगर इसमें समाधान नहीं निकलता है तो मामला विवाद निपटान पैनल तक जा सकता है।

इससे पहले भी WTO का खटखटाया था दरवाजा

यह इस साल चीन की तरफ से भारत के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में दायर की गई दूसरी याचिका है। इससे पहले अक्टूबर में भी चीन ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी)और बैटरी क्षेत्र में कथित अनुचित सब्सिडी को लेकर भारत के खिलाफ याचिका दायर की थी। उस याचिका में चीन ने आरोप लगाया था कि भारत की ईवी एवं बैटरी क्षेत्रों से जुड़ी सब्सिडी नीतियां उसके हितों को प्रभावित कर रही हैं। उसने इस मामले में भी डब्ल्यूटीओ से भारत के साथ परामर्श की मांग की थी।

‘मेक इन इंडिया’से परेशान है ड्रैगन

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को भारत की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी नीतियों से असहजता हो रही है। भारत घरेलू उद्योगों को मजबूत करने और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है, जिससे चीन की सस्ती आयात रणनीति को झटका लगा है। दिलचस्प बात यह है कि चीन खुद अपने उद्योगों को भारी सब्सिडी देता रहा है, लेकिन जब भारत ऐसा करता है तो उसे वैश्विक मंचों की याद आ जाती है। विशेषज्ञ इसे चीन का दोहरा मापदंड बताते हैं।

भारत का है ये तर्क

वहीं, भारत का साफ कहना है कि वह अपनी नीतियां पूरी तरह से विश्व व्यापार संगठन के नियमों के दायरे में बनाता है। देश की औद्योगिक और ऊर्जा नीतियां घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। भारत किसी एक देश को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं,बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए फैसले ले रहा है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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