Gaza Board Of Peace: चीन ने ठुकराया, भारत ने अब तक नहीं साफ किया रुख; ट्रंप के प्लान को वैश्विक स्वीकार्यता मिलना कितना कठिन?
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 22, 2026, 02:33 PM IST
डोनाल्ड ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' गाजा में शांति योजना के दूसरे चरण के दौरान काम करना शुरू कर देगा। पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसके लिए अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच मिस्र, कतर, अमेरिका और तुर्की ने मध्यस्थता की थी। ऐसे में चीन का यह बयान ट्रंप के प्लान की वैश्विक स्वीकार्यता के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप-जिनपिंग (ANI)
चीन ने ट्रंप के गाजा पीस ऑफ बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। चीन ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। ये टिप्पणी X पर एक पोस्ट में भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने की। वहीं, ट्रंप के प्लान पर अगर भारत के रुख की बात करें तो भारत ने अभी तक इस पर अपना जवाब नहीं दिया है। ऐसे में देखना यह होगा कि ट्रंप के इस प्लान को वैश्विक स्वीकार्यता मिल भी पाएगी या नहीं।
उन्होंने चीनी विदेश मंत्रालय (एमओएफए) के हवाले से कहा कि चीन को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का निमंत्रण प्राप्त हुआ है। चीन हमेशा से सच्चे बहुपक्षवाद का पालन करता आया है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में चाहे जो भी बदलाव आए, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बनाई गई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध रहेगा।
चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान इस सप्ताह गाजा शांति बोर्ड का आधिकारिक तौर पर गठन करने की कोशिश कर रहे हैं।
दावोस में बोर्ड ऑफ पीस को लेकर क्या बोले ट्रंप?
पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने इसे अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड बताया और संयुक्त राष्ट्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र से भी अधिक काम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मध्य पूर्व में शांति ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करके ही हासिल की गई थी। उन्होंने कहा कि हम सबको चाहते हैं। हम उन सभी देशों को चाहते हैं जहां लोगों का नियंत्रण हो, लोगों के पास शक्ति हो, ताकि हमें कभी कोई समस्या न हो। यह अब तक का सबसे महान बोर्ड है। और हर कोई इसका हिस्सा बनना चाहता है। हां, इसमें कुछ विवादास्पद लोग भी हैं, लेकिन ये वे लोग हैं जो काम को अंजाम देते हैं। ये वे लोग हैं जिनका जबरदस्त प्रभाव है।
शांति बोर्ड के बारे में उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि शांति बोर्ड अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड होगा। और यह बहुत से ऐसे काम करेगा जो संयुक्त राष्ट्र को करने चाहिए थे। और हम संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेंगे। लेकिन शांति बोर्ड खास होगा। हमें शांति मिलेगी। इसकी शुरुआत गाजा, मध्य पूर्व से हुई। हमें मध्य पूर्व में शांति मिल गई है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह संभव होगा। और यह ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करके संभव हुआ। इसके बिना यह कभी संभव नहीं हो सकता था। लेकिन मुझे लगता है कि यह बोर्ड वास्तव में शानदार होगा, यह अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड होगा।
ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में कौन-कौन शामिल
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अध्यक्ष
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
- स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के विशेष वार्ताकार
- जेरेड कुशनर, ट्रंप के दामाद
- टोनी ब्लेयर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री
- मार्क रोवन, अरबपति अमेरिकी फाइनेंसर
- अजय बंगा, विश्व बैंक के अध्यक्ष
- रॉबर्ट गैब्रियल, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में ट्रंप के वफादार सहयोगी
शांति योजना के दूसरे चरण के दौरान काम कर देगा शुरू
ऐसा कहा जा रहा है कि यह परिषद शांति योजना के दूसरे चरण के दौरान काम करना शुरू कर देगी। पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसके लिए अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच मिस्र, कतर, अमेरिका और तुर्की ने मध्यस्थता की थी। यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस को पश्चिम देशों ने डिप्लोमैटिक तौर पर काफी हद तक अलग-थलग कर दिया है। हालांकि ट्रंप ने रूस को भी इसमें शामिल होने के लिए न्योता भेजा था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया था कि राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का ऑफर मिला है। हम अभी इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
ट्रंप हैं इसके आजीवन अध्यक्ष
बोर्ड ऑफ पीस, गाजा के लिए एक 'अम्ब्रेला ओवरसाइट बॉडी' के तौर पर काम करेगा और जिसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे, उसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। मिडिल ईस्ट और दुनिया भर के कई देशों के नेताओं को इसके लिए न्योता भेजा गया है। भारत भी इसमें शामिल है। बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवन भर करेंगे। यह गाजा संघर्ष को सुलझाने से शुरू होगा और फिर दूसरे संघर्षों से निपटने के लिए इसका विस्तार किया जाएगा। व्हाइट हाउस के एक बयान के अनुसार, प्रस्तावित कार्यकारी बोर्ड के सदस्य गाजा के स्थिरीकरण और दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण विभागों की देखरेख करेंगे। इनमें शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण, बड़े पैमाने पर वित्तपोषण और पूंजी जुटाना शामिल हैं। हालांकि, जो देश 1 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा करते हैं, उन्हें बोर्ड में स्थायी सीटें मिलेंगी, जबकि जो देश भुगतान नहीं करते हैं वे भी तीन साल के कार्यकाल के लिए शामिल हो सकते हैं।
क्या काम करेगा ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस'
ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के नेतृत्व वाला शांति बोर्ड युद्ध के बाद गाजा में शांति स्थापित करने और उसके भविष्य को समृद्ध करने पर ध्यान देगा। इतना ही नहीं, भविष्य में यह वैश्विर रूप से अपना विस्तार कर एक तरह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरह काम करेगा। ट्रंप ने विश्व इतिहास में अभी तक का सबसे प्रभावशाली निर्णायक समूह करार दिया है।
25 देश शामिल होने के लिए सहमत- विटकॉफ का दावा
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बुधवार (स्थानीय समय) को सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि 25 देशों ने बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार करने वाले देशों में इज़राइल, कोसोवो, संयुक्त अरब अमीरात, हंगरी, बेलारूस, अज़रबैजान, मिस्र, आर्मेनिया, तुर्की, पाकिस्तान, कतर और जॉर्डन शामिल हैं।