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'डस्टबिन में छिपना पड़ेगा', ट्रंप के प्लेन बदलने का ईरान ने उड़ाया मजाक; आखिर एयरफोर्स वन छोड़ C-32A में क्यों गए अमेरिकी राष्ट्रपति?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तुर्किए दौरे से लौटते समय गुप्त रूप से विमान बदलने का मामला सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरे की आशंका के बाद ट्रंप को एयरफोर्स वन की जगह C-32A विमान से रवाना किया गया, जबकि एयरफोर्स वन को डिकॉय के तौर पर उड़ाया गया। इस घटना पर ईरानी सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने मीम्स के जरिए ट्रंप का मजाक उड़ाया और इसे ईरान की सैन्य ताकत से अमेरिकी राष्ट्रपति की कथित घबराहट के तौर पर पेश किया।

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ट्रंप ने बदला विमान तो ईरान ने उड़ाया मजाक, मीम्स में दिखाया ‘किससे घबराए अमेरिकी राष्ट्रपति?'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने तुर्किए की यात्रा से लौटने के दौरान विमान बदलाथा। वो एयरफोर्स वन विमान से गुप्त तरीके से दूसरे विमान में चले गए थे। ईरान के सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रंप के इस कदम का मीम्स बनाकर मजाक उड़ाया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि यह कदम दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) की ताकत से कितने घबराए हुए हैं।

ईरान ने कैसे उड़ाया मजाक?

ईरानी मीडिया ने दावा किया कि यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर कितने चिंतित हैं। ईरान के दक्षिण अफ्रीका स्थित दूतावास के X अकाउंट से एक मीम भी शेयर किया गया, जिसमें ट्रंप को खाने के सामान से भरे कैटरिंग बॉक्स के अंदर छिपा हुआ दिखाया गया। पोस्ट में तंज कसते हुए कहा गया कि जल्द ही ट्रंप को “कूड़ेदान में छिपना पड़ेगा”। इस मीम का सीधा संदर्भ उसी कैटरिंग ट्रक से था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ट्रंप को बिना भनक लगे दूसरे विमान तक पहुंचाने में किया गया था।

आखिर विमान बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि ट्रंप जिस विमान से तुर्किये से रवाना होंगे, उसे कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाया जा सकता है। खतरे का संबंध ईरान या ईरान समर्थित समूहों से होने की आशंका जताई गई थी।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप की सुरक्षा को देखते हुए सीक्रेट सर्विस ने बेहद गोपनीय तरीके से योजना तैयार की। ट्रंप को छोटे और कम पहचान वाले C-32A विमान में बैठाया गया, जबकि एयर फोर्स वन को उसी दिशा में रवाना किया गया ताकि संभावित हमलावरों को राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन का पता न चल सके।

क्या था पूरा मामला?

मामला पिछले महीने तुर्किये की राजधानी अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन के बाद का है। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप को 8 जुलाई को तुर्किये से रवाना होना था। शुरुआत में उन्हें एयर फोर्स वन से यात्रा करनी थी, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा अधिकारियों को कथित तौर पर एक संभावित ईरानी खतरे की जानकारी मिली।

अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने खतरे को गंभीर मानते हुए राष्ट्रपति की यात्रा की योजना अचानक बदल दी। ट्रंप को सार्वजनिक तौर पर एयर फोर्स वन की ओर जाते हुए दिखाया गया, लेकिन इसके बाद उन्हें एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के जरिए चुपचाप एक छोटे C-32A सैन्य विमान तक पहुंचाया गया। इस दौरान एयर फोर्स वन अलग से रवाना हुआ और उसमें वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी, व्हाइट हाउस के कर्मचारी तथा पत्रकारों का प्रेस पूल मौजूद था। यानी बड़ा विमान एक तरह से डिकॉय यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान की भूमिका में था

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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