China speaks on Middle East crisis: ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध पर आम तौर पर चुप रहने वाले चीन ने प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि ने इस युद्ध को लेकर अमेरिका-इजराइल को चेताया है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में किसी भी तरह के सैन्य कार्रवाई का चीन विरोध करता है। फू कॉन्ग ने कहा कि 'इस तरह की कार्रवाई अवैध एवं मनमाने तरीके से बल के इस्तेमाल वैध बना देगी।' चीन का यह बयान तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान को 'पाषाण युग' में भेज देने की चेतावनी दी। चीन और ईरान के बीच करीबी संबंध हैं। ईरान का करीब 90 प्रतिशत तेल चीन खरीदता रहा है। चीन का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से हालात सुधरेंगे नहीं बल्कि और जटिल होंगे।
सैन्य तरीके से नहीं निकलेगा स्थायी समाधान-चीन
चाइना डेली के मुताबिक मध्य पूर्व के हालात और युद्ध पर विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि 'सैन्य तरीके से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता और इलाके में बढ़ते तनाव से किसी भी पक्ष का हित नहीं होगा।' दरअसल, ट्रंप ने कहा है कि 'दो से तीन सप्ताह के भीतर ईरान के साथ यदि कोई समझौता नहीं होता है तो वह उस पर भीषण हमला करेंगे और उसे पाषाण युग में पहुंचा देंगे।' ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरान पर और हमले की आशंका बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि यूएस ईरान के नागरिक एवं बुनियादी संरचनाओं को निशाना बना सकता है।
सेना में 70 लाख ईरानी हुए भर्ती
हालांकि, ट्रंप की धमकियों के बावजूद ईरान के तेवर नरम नहीं हुए हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 70 लाख ईरानी किसी भी अमेरिकी जमीनी आक्रमण के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं। मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका को चुनौती देने वाली कई पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की हैं। उन्होंने ’एक्स’ पर लिखा, "एक हफ्ते से भी कम समय में पूरे देश में एक बड़ा अभियान चलाया गया, जिसमें लगभग 70 लाख ईरानी सामने आए और कहा कि वे हथियार उठाकर अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।"
सोशल मीडिया पर कई दिन से इस दावे के संबंध में पोस्ट की जा रही हैं। इस दावे का उल्लेख करने वाले कालीबाफ पहले उच्चस्तरीय अधिकारी हैं।
