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चीन में कई मिलिट्री जनरल बर्खास्त, सरकार के साथ क्यों बढ़ रही है तनातनी?

China political crisis: अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन कार्रवाइयों के पीछे सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि शी जिनपिंग की 'राजनीतिक निष्ठा' का मुद्दा भी हो सकता है।

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चीन में कई मिलिट्री जनरल बर्खास्त, सरकार के साथ क्यों बढ़ रही है तनातनी?

Xi Jinping military crackdown: चीन की सेना में इन दिनों बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। एक के बाद एक कई बड़े सैन्य अधिकारियों और पूर्व रक्षा मंत्रियों पर कार्रवाई ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर चीन की सत्ता और सेना के बीच ऐसा क्या चल रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लगातार अपने ही सैन्य ढांचे में सर्जरी करनी पड़ रही है। चीन के नेता शी जिनपिंग ने सेना के बड़े अधिकारियों के खिलाफ जो कार्रवाई की है, वह हाल ही में हुई एक विधायी बैठक में साफ दिखाई दी। इस बार पिछले साल के 40 जनरलों के मुकाबले मुट्ठी भर ही जनरल निशाने हैं। फिर भी, शी जिनपिंग ने संकेत दिया कि माओ के जमाने जैसी उथल-पुथल अभी खत्म नहीं हुई है। एकदम गंभीर चेहरे के साथ, उन्होंने बाकी बचे अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे बेवफाई से सावधान रहें।

उन्होंने कहा, 'सेना में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होना चाहिए जिसके दिल में पार्टी के प्रति कोई दुविधा हो।' शी जिनपिंग द्वारा अपने 13 साल के शासनकाल के सबसे बुरे राजनीतिक संकटों में से एक का यह एक दुर्लभ सार्वजनिक जिक्र। उन्होंने उस सैन्य नेतृत्व पर से अपना भरोसा खो दिया था, जिसे उन्होंने एक दशक लगाकर अपने हिसाब से ढाला था।

ताइवान की नेशनल चेंगची यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर चिएन-वेन कोउ ने कहा, 'जब शी जिनपिंग 'दुविधा भरा दिल' शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो उनका मतलब बहुत गहरा होता है।' यह मुहावरा प्राचीन चीनी ग्रंथों में मिलता है, जो शासकों को धोखेबाज जनरलों से सावधान रहने की सलाह देते हैं; इनमें वह किताब भी शामिल है जिसे शी जिनपिंग ने अपनी किताबों की अलमारी में रखा हुआ है।

प्रोफेसर कोउ ने कहा, 'उनके सबसे भरोसेमंद और अहम साथी भी भरोसा खो चुके हैं।' 'अब उनका भरोसा और कौन जीत सकता है?'

यह संकट शी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक के लिए खतरा बन गया है: चीनी सेना को नए एयरक्राफ्ट कैरियर, हाइपरसोनिक मिसाइलों और बढ़ते परमाणु हथियारों के साथ एक जबरदस्त ताकत में बदला लेकिन अब परेशानी बाहर निकलकर सामने आ रही है, जब चीन की अमेरिका के साथ प्रतिद्वंद्विता और तेज हो गई है।

भ्रष्टाचार की बात और नप गए कई बड़े अधिकारी

चीन की युद्ध की तैयारी में शायद सालों तक रुकावट बनी रहे, और इसकी वजह वही 'सफाई अभियान' हो सकता है जिसे शी ने सेना की कतारों को शुद्ध और मजबूत बनाने के लिए जरूरी बताया। जो चीज कभी भ्रष्टाचार पर एक सीमित कार्रवाई जैसी लग रही थी, वह दर्जनों शीर्ष अधिकारियों की बड़े पैमाने पर बर्खास्तगी में बदल गई और इस साल की शुरुआत में इसका नतीजा चीन के शीर्ष सैन्य कमांडर झांग यूक्सिया के पतन के रूप में सामने आया, जो शी के करीबी माने जाते थे।

कुछ लोगों के मुताबिक, उन दोनों के बीच आखिरी दरार तब पड़ी जब शी ने उस जनरल को तरक्की देने की कोशिश की जो इस सफाई अभियान की अगुवाई कर रहा था और उसे जनरल झांग के बराबर का ओहदा देना चाहा। जनरल झांग ने इस पर ऐतराज जताया। कुछ महीनों बाद, उन्हें पद से हटा दिया गया।

पिछले हफ्ते इस अभियान की गंभीरता एक बार फिर साफ तौर पर देखने को मिली, जब एक सैन्य अदालत ने दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को रिश्वतखोरी के आरोप में मौत की सजा सुनाई।

पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा

हाल ही में चीन के पूर्व रक्षा मंत्री Li Shangfu और Wei Fenghe को भ्रष्टाचार के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई, हालांकि इसे दो साल के लिए निलंबित रखा गया है। चीन में इसे बेहद कड़ा संदेश माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 से अब तक चीन की सेना और रक्षा व्यवस्था से जुड़े कई बड़े अधिकारी या तो हटाए जा चुके हैं, या फिर अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए। कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) (पूर्व में सेकेंड आर्टिलरी कॉर्प्स) और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) जैसे बेहद संवेदनशील हिस्सों तक पहुंची।

सेना पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाह रहे जिनपिंग?

विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान नहीं चला रहे, बल्कि सेना पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहते हैं। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में सेना की वफादारी सबसे अहम मानी जाती है। ऐसे में शी किसी भी तरह की अंदरूनी असहमति या शक्ति केंद्र को खत्म करना चाहते हैं।

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन कार्रवाइयों के पीछे सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि 'राजनीतिक निष्ठा' का मुद्दा भी हो सकता है। कई वरिष्ठ जनरलों पर पार्टी लाइन से हटने और आंतरिक गुटबाजी के आरोप भी लगाए गए हैं।

चीन की सेना PLA को शी जिनपिंग ताइवान और दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। लेकिन लगातार हो रही बर्खास्तगी और गिरफ्तारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में शामिल PLA अंदर से उतनी मजबूत है, जितनी बाहर दिखाई जाती है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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