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जनसंख्या बढ़ाने के लिए कैसे-कैसे तरीके, चीन में छात्रों को प्यार में पड़ने के लिए दिया जा रहा 'स्प्रिंग ब्रेक'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 2, 2023, 11:03 AM IST

China falling Birth Rate: चीन के नौ कॉलेजों में स्प्रिंग ब्रेक का ऐलान किया गया है। यह छुट्टी एक सप्ताह के लिए दी जा रही है, जिसमें छात्रों को बसंत का अनुभव करने, प्रकृति के समीप जाने और प्यार में पड़ने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि यह योजना चीन में गिरते जन्मदर को देखते हुए लाई गई है।

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चीन में छात्रों को मिल रहा स्प्रिंग ब्रेक

Photo : iStock

Spring Break in China: चीन में जनसंख्या तेजी से गिर रही है। एक अनुमान के मुताबिक, जल्द ही यह देश बुजुर्गों का देश बन जाएगा। इस आशंका से चीनी अधिकारी डरे हुए हैं, ऐसे में वे गिरते जन्मदर और जनसंख्या को बढ़ाने के लिए नए-नए उपाय कर रहे हैं। इनमें नए शादी शुदा जोड़े के लिए एक महीने की पेड लीव से लेकर वन चाइल्ड पॉलिसी को वापस लेना भी शामिल है। हालांकि, अब सरकार की ओर से नई सिफारिश की गई है, जिसने सभी को चौंका दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में कॉलेज के छात्रों को प्यार में पड़ने के लिए स्प्रिंग ब्रेक दिया जा रहा है। यह स्पेशल छुट्टी एक सप्ताह की है, जो छात्र एवं छात्राओं को अपने प्यार की तलाश पूरी करने के लिए दी जा रही है।

कई कॉलेजों में स्प्रिंग ब्रेक का ऐलान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फैम मेई एजुकेशन ग्रुप की ओर से चलाए जा रहे नौ कॉलेजों में स्प्रिंग ब्रेक का ऐलान किया गया है। पहली बार इस छुट्टी की घोषणा 21 मार्च को की गई, इसके बाद अन्य कॉलेजों में एक अप्रैल से सात अप्रैल के बीच छुट्टी दी जा रही है।

कॉलेज प्रशासन ने क्या कहा

सिचुआन में एक एविएशन कॉलेज के डिप्टी डीन लियू पिंग ने कहा कि यह छुट्टी छात्रों को जीवन जीने और अध्ययन करने की कला का अभ्यास करने की अनुमति देगी। यह छुट्टी उन्हें फूलों का आनंद लेने और प्यार में पड़ने में भी मददगार होगी। बता दें, इस छुट्टी के दौरान छात्रों को असाइनमेंट भी दिया गया है, जिसमें उन्हें अपनी यात्रा के अनुभवों को लिखने के लिए कहा गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कॉलेजों की ओर से इस तरह की छुट्टियां जन्मदर बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा हो सकती है।

तेजी से गिर रही चीन की जनसंख्या

चीन में जनसंख्या दर काफी तेजी से गिर रही है। इसका कारण 1980 में लागू की गई एक बच्चा नीति को बताया जा रहा है। इस नीति को चीन ने 2021 में वापस ले लिया था और तीन बच्चों तक की अनुमति दी गई थी। इसके बाद भी जन्मदर न बढ़ना चीनी सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते साल की तुलना में चीन की जनसंख्या 2022 में साढ़े आठ लाख तक कम हो गई थी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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