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कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा, सरकार बची लेकिन संकट बरकरार

Justin Trudeau: कनाडा के मुख्य विपक्षी दल कंजर्वेटिव ने सरकार के खिलाफ एक और अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। ऐसे में ट्रूडो को आने वाले दिनों में और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो

Photo : BCCL

Justin Trudeau: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है, जिससे उनकी सरकार पर छाया संकट फिलहाल खत्म हो गया है। हालांकि, नौ साल के कार्यकाल में टूडो की लोकप्रियता काफी घटी है, जिसके चलते उन्हें आगे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक, ट्रूडो की लिबरल सरकार को हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 211 के मुकाबले 120 वोट ही पड़े।

हालांकि, कनाडा के मुख्य विपक्षी दल कंजर्वेटिव ने सरकार के खिलाफ एक और अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। ऐसे में ट्रूडो को आने वाले दिनों में और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें, ऐसा तब हुआ है जब वामपंथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) ने इस महीने की शुरुआत में लिबरल के साथ गठबंधन समझौते को तोड़ दिया था, जिससे ट्रूडो सरकार संकट में आ गई थी।

चुनाव कराना चाहते हैं विपक्षी नेता

जनमत सर्वेक्षणों में बहुत आगे जस्टिन ट्रूडो के विपक्षी टोरी नेता पियरे पोयलिवर काफी आगे चल रहे हैं। वह ट्रूडो की सरकार गिराकर नए सिरे से चुनाव कराना चाहते हैं। बीते कुछ दिनों में वह ट्रूडो के खिलाफ काफी आक्रामक भी दिखे हैं। उन्होंने ट्रूडो को हर मोर्चे पर विफल करार दिया है। उनके मुताबिक वर्तमान कनाडियाई पीएम बढ़ती महंगाई, आवासीय संकट और अपराध से निपटने में विफल रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय ऋण दोगुना हो गया है।

कैसी है कनाडाई संसद की स्थिति

बता दें, जस्टिन ट्रूडो 2015 में कनाडा की सत्ता में आए थे। 2019 और 2021 के मतपत्रों में भी वह पोयलिवर के दो पूर्ववर्तियों को हराकर सत्ता में बने रहने में सफल रहे। लिबरल्स को गठबंधन साथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ किए गए समझौते से उनकी सरकार 2025 के अंत तक सत्ता में बनी रहती। हालांकि, इसी महीने एनडीपी ने लिबरल्स के साथ अपने गठबंधन को तोड़ दिया, जिससे ट्रूडो सरकरार पर संकट आ गया। वर्तमान स्थिति की बात करें तो लिबरल के पास वर्तमान में 153 सीटें हैं, जबकि कंजरवेटिव के पास 119, ब्लॉक क्यूबेकॉइस के पास 33 और एनडीपी के पास 25 सीटें हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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