स्कोर कम देखकर तुरंत ये नहीं सोचना चाहिए कि "अब तो साल खराब है"। पहले अपनी AIR, कैटेगरी और पिछले साल के कटऑफ चेक करें। कई बार कम स्कोर पर भी सरकारी/प्राइवेट कॉलेज मिल जाता है। ठंडे दिमाग से लिस्ट बनाएं, फिर फैसला लें। (Image - cHatGPT)
AIQ हो या स्टेट काउंसलिंग - रजिस्ट्रेशन, चॉइस फिलिंग, सीट अलॉटमेंट, रिपोर्टिंग... हर स्टेप की तारीख फिक्स होती है। एक डेट भी मिस हुई तो सीट हाथ से निकल जाएगी। फोन में अलार्म लगा लें और ऑफिशियल साइट रोज चेक कें।
किसी दोस्ता का स्कोर 650 आया, लेकिन आपका 520 ही आया" - ये सोचकर डिमोटिव मत हों। हर किसी की कैटेगरी, रैंक, स्टेट अलग है। कोई NRI सीट लेगा, कोई डोमिसाइल से। अपनी लड़ाई खुद लड़ें, दूसरों का स्कोर देखकर टेंशन न लें।
प्रैक्टिकल कहां होगी? फैकल्टी और फीस ठीक है क्या? इंटर्नशिप का क्या सीन है? आपको कई सालों तक एक कोर्स में रहना है इसलिए 5 मिनट में डिसाइड मत करें।
काउंसलिंग का सबसे जरूरी स्टेप है चॉइस फिलिंग। 3 तरह के कॉलेज रखें: Dream - टॉप वाले, Realistic - जहां मिलने के चांस हैं और तीसरा Safe - जहां पक्का मिल जाए। इसके अलावा दोस्त की कॉपी मत करें। अपनी रैंक के हिसाब से चॉइस फिलिंग भरें।
ड्रॉप लेना छोटा फैसला नहीं होता, इसलिए बहुत सोचने की जरूरत है। अगर 1 साल दोबारा देना है, तो पहले खुद से पूछो: "पिछली बार कहां गलती हुई? क्या मैं 1 साल और 100% दे पाऊंगा?" अगर हां, तो प्लान बनाकर लग जाएं। अगर मन नहीं है तो जबरदस्ती मत करें।
BDS, BAMS, BHMS, B.Sc Nursing, BPT, Allied Health में भी बहुत स्कोप है। डॉक्टर बनने के कई रास्ते हैं। एक बंद हुआ तो दूसरा पता करें।